यूपी-जापानः दीर्घकालिक विकास की विश्वसनीय साझेदारी

यूपी-जापानः दीर्घकालिक विकास की विश्वसनीय साझेदारी

-डॉ. शिरीष मिश्रा, प्रोफेसर, केंद्रीय वाणिज्य विश्वविद्यालय

लखनऊ 
नई दिल्ली में यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट शुरू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश का वह अध्याय प्रारंभ हो गया है, जिसमें वैश्विक अर्थव्यवस्था में राज्य की विशिष्ट पहचान लिखी जानी है। प्रमुख कंपनियों के सीईओज व बिजनेस लीडर्स साथ आयोजित राउंड टेबल मीटिग इस अध्याय का प्रथम सत्र है, जिसमें जापान के यामानाशी प्रांत की औद्योगिक विशेषज्ञता, तकनीकी दक्षता और गुणवत्तापरक उत्पादन की परंपरा तथा उत्तर प्रदेश की विशाल बाजार क्षमता, युवा मानव संसाधन और निवेश-अनुकूल वातावरण एक-दूसरे के पूरक के रूप में दिखाई दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अपने संबोधन में यह कहना कि जापान ‘लैंड ऑफ द राइजिंग सन’ यानी उगते सूरज की भूमि है तो उत्तर प्रदेश को ‘लैंड ऑफ सूर्यवंश’ यानी सूर्यवंश की धरती वस्तुतः भौगोलिक पहचान को सांस्कृतिक और सभ्यतागत रिश्ते का रूप देने का प्रयास है। इस इन्वेस्टमेंट मीट के साथ ही उत्तर प्रदेश और जापान अब विकास की एक दीर्घकालीन विश्वसनीय साझेदारी की ओर बढ़ चुके हैं और आने वाले दिनों में इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगेंगे।

भारत और जापान का रिश्ता वैसे भी एक गहरे भरोसे पर टिका रहा है, लेकिन अब इस रिश्ते ने उत्तर प्रदेश तक विस्तार लेकर इसे और मजबूती दे दी है। यह उत्तर प्रदेश के विकास-मॉडल की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति भी है। पिछले डेढ़ साल में उत्तर प्रदेश और जापान के बीच जिस तरह से संवाद और समन्वय का क्रम बना, उसकी परिणति अब निवेश, तकनीक और साझा भविष्य की ठोस योजनाओं में हुई है। राज्य भरोसेमंद होता है तो उसकी ख्याति दूर तक जाती है और इस भरोसे ने ही जापान का ध्यान उत्तर प्रदेश की ओर खींचा और नवंबर-दिसंबर 2024 में जापान के यामानाशी के गवर्नर स्वयं उत्तर प्रदेश आए। यह यात्रा सामान्य शिष्टाचार भेंट तक सीमित नहीं थी। किसी विदेशी राज्य के शीर्ष प्रशासनिक प्रतिनिधि का यूपी आना और यहां की संभावनाओं को करीब से देखना अपने साथ असीमित संभावनाएं भी लिए था।

इसके बाद फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं एक बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ जापान और यामानाशी गए और राज्य की उपलब्धियों और अपने संसधानों को वहां के निवेशकों के समक्ष रखा। जापान यात्रा की सफलता का आकलन इस बात से किया जा सकता है कि वहां के निवेशकों ने डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक के सहमति पत्र सौंपे। अब उसी कड़ी में 200 से अधिक निवेशक, उद्योग जगत के प्रमुख, सीईओज व बिजनेस लीडर्स यामानाशी के गवर्नर कोटारो नागासाकी के नेतृत्व में दिल्ली पहुंच चुके हैं और वे उत्तर प्रदेश का दौरा करेंगे। यह उस संस्थागत रिश्ते का प्रमाण है, जिसे योगी सरकार ने पूरे भरोसे से गढ़ा है। यह भरोसा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। ऑटोमोबाइल, रोबोटिक्स, हाइड्रोजन ऊर्जा और व्यापक विनिर्माण क्षेत्र में जापान की तकनीकी श्रेष्ठता और उत्तर प्रदेश की औद्योगिक महत्वाकांक्षा एक साथ दिखाई देगी।
 
अब से एक दशक पहले उत्तर प्रदेश के लोगों ने इस बात की कल्पना तक नहीं की थी कि जापान जैसे विकसित देश के उद्यमी यहां आने को सोत्साह तैयार होंगे। पूर्ववर्ती शासनकाल में अराजकता और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के प्रति उदासीनता ने इस राज्य पर ‘बीमारू’ का ठप्पा लगा दिया था। लेकिन योगी सरकार के शासनकाल में यूपी ने अपनी अलग पहचान गढ़ी। कानून-व्यवस्था की मजबूती, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की गंभीर कोशिशें, बुनियादी ढांचे के कायाकल्प और नीतिगत स्थिरता ने पूरे राज्य की छवि को निखारा तो निवेशकों को भी यहां संभावनाएं दिखने लगीं। जब कोई राज्य विश्वसनीयता अर्जित कर लेता है तो दुनिया के सबसे सतर्क और निवेशक भी उसकी ओर बढ़ने लगते हैं। औद्योगिक उन्नति के क्षेत्र में आज हम किस मुकाम पर खड़े हैं, इसके लिए बस एक ही उदाहरण काफी होगा कि देश के 55 प्रतिशत मोबाइल फोन और करीब 60 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का यूपी में निर्माण हो रहा है। जापान के सहयोग से इस दिशा में और गति हासिल होगी। कह सकते हैं कि राज्य के विकास का नैरेटिव अब घरेलू राजनीति का विषय नहीं रहा, बल्कि वैश्विक निवेश के केंद्र में है, जिसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गढ़ा है।
 
उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्षों में खुद को निवेश के अनुकूल राज्य के रूप में गंभीरता से तैयार किया है। राज्य के पास 75,000 एकड़ का भूमि बैंक है और 36 सेक्टोरल नीतियां हैं, जो हर तरह के उद्योग को एक स्पष्ट, पारदर्शी और अनुमानित नीतिगत ढांचा देती हैं। किसी भी विदेशी निवेशक के लिए यह सबसे बड़ी चिंता होती है कि जमीन और नीति को लेकर अनिश्चितता न रहे। उत्तर प्रदेश ने इस अनिश्चितता को व्यवस्थित योजना में बदल दिया है, जो उद्मियों को आकर्षित करने में सक्षम है। यह पहली बार है, जब जापान का कोई प्रतिनिधिमंडल इतने बड़े स्तर पर निवेश की दृष्टि से भारत आया है और उसका गंतव्य उत्तर प्रदेश है। उत्तर प्रदेश इसलिए कि इसकी क्षमता में सर्वाधिक युवा वाला जनसंख्या बल है, स्केल है, स्किल है, और एक ऐसी सरकार भी है जो डबल इंजन की गति से काम करती है। जापान की तकनीक और अनुशासन को उत्तर प्रदेश के युवा कार्यबल की ऊर्जा और सरकार की प्रशासनिक गति के साथ जोड़ा जाए तो एक सभ्यतागत सहयोग बनेगा, जहां एक पक्ष अपने अनुभव और तकनीक का तो दूसरा पक्ष अपनी ऊर्जा, आकांक्षा और गति का योगदान देगा। आने वाले वर्षों में जब हम उत्तर प्रदेश के औद्योगिक मानचित्र को देखेंगे, तो जापान ओर यूपी की यह साझेदारी दीर्घकालिक विकास यात्रा की सबसे मजबूत बुनियाद के रूप में दिखाई देगी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button