US के हमले के बाद बढ़ा युद्ध का खतरा! इजरायल ईरान से बदला लेने की तैयारी में, सामने आया बड़ा प्लान

तेहरान 

ईरान और अमेरिका की जंग दोबारा शुरू हो चुकी है. ट्रंप ने ऐलान कर दिया है कि सीजफायर अब खत्म हो चुका है और उन्हें ईरान के साथ बातचीत का कोई मतलब ही समझ में नहीं आ रहा है ट्रंप ने एक बार फिर से दोहराया है कि वो ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं कर देंगे और उन्होंने रिजीम चेंज की भी हिंट दी है. ट्रंप के इस ऐलान के तुंरत बाद इजरायल एक्टिव हो गया है और इजरायली मीडिया के मुताबिक नेतन्याहू जल्द ही ईरान पर अटैक लॉन्च करने वाला है। 

सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' के इलाके में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर जो हमले किए हैं, वे दस दिन पहले हुए हमलों की तुलना में 'चार से पांच गुना ज्यादा बड़े और शक्तिशाली' हैं।

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए लाखों लोग सड़कों पर हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन अभी कई घंटों तक जारी रह सकता है।

तेहरान का बढ़ा होर्मुज लालच, नेतन्याहू की आंखें लाल

 प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की आंखें लाल हो चुकी हैं और इजरायली सेना ने ईरान को नेस्तनाबूद करने के लिए अपने फाइटर जेट्स के इंजन स्टार्ट कर दिए हैं. ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं है और अब उसका लालच और बढ़ गया है. इस पूरी लड़ाई की सबसे बड़ी जड़ बना है दुनिया का सबसे सेंसिटिव समुद्री रास्ता- ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’, जहां ईरान एक खतरनाक नया खेल खेलने की जिद पर अड़ गया है। 

होर्मुज में ईरान का नया पैंतरा और बढ़ता लालच
दरअसल, ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ एक ऐसा समुद्री रास्ता है जहां से पूरी दुनिया का लगभग 20 से 30 फीसदी कच्चा तेल गुजरता है. मार्च और अप्रैल के महीने में जब अमेरिका और ईरान के बीच भयंकर गोलाबारी हो रही थी, तब ईरान ने इस रास्ते को बंद करने की धमकी दी थी. बाद में जून के महीने में दोनों देशों के बीच ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ साइन हुआ और कुछ शर्तों पर युद्धविराम हुआ था। 

लेकिन ईरान अब इस रास्ते पर अपना पुराना हक नहीं, बल्कि एक ‘नया स्टेटस को’ (New Status Quo) यानी अपना नया कंट्रोल थोपना चाहता है. तेहरान का कहना है कि अब पुराना दौर भूल जाओ. ईरान ने ऐलान कर दिया कि अब जो भी कमर्शियल जहाज इस रास्ते से गुजरेंगे, उन्हें पहले ईरान की ‘परशियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी’ से भीख की तरह इजाजत मांगनी होगी, ईरान के तय किए रास्तों पर चलना होगा और तेहरान को भारी-भरकम टैक्स या फीस देनी होगी. ईरान इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते को स्वेज नहर की तरह अपनी जागीर बनाना चाहता है, जिससे अमेरिका और इजरायल भड़क गए हैं। 

अमेरिका ने क्यों उठाया यह कदम?
पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर ईरान की तरफ से हुए नए हमलों के जवाब में अमेरिका ने यह जवाबी कार्रवाई की है। इसके साथ ही, अमेरिका ने ईरानी तेल पर दी गई प्रतिबंधों की अस्थायी छूट को भी तुरंत रद्द कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले तीन तेल टैंकरों पर हमले के बाद अमेरिका ने तेहरान पर दबाव काफी बढ़ा दिया है।

अमेरिकी सेंटकॉम ने "अमेरिकी सेना ने ईरान के हवाई रक्षा तंत्र, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार साइटों, एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से अधिक छोटी नावों को निशाना बनाया है। इस कार्रवाई का मकसद अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग पर हमला करने की ईरान की क्षमता को खत्म करना है।"

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की में चल रहे नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान ही इस हमले की योजना को मंजूरी दी थी।

कहां-कहां गूंजे धमाके?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के बंदरगाह शहरों और द्वीपों पर भारी बमबारी की गई है।

    केश्म द्वीप: कम से कम 6 बार बड़े धमाकों की आवाज सुनी गई।
    सिरिक: 7 से 9 मिसाइलें गिरने की खबर है।
    बंदर अब्बास: इस प्रमुख बंदरगाह शहर में करीब 10 धमाके सुने गए।

एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान चेतावनियों को नहीं सुन रहा था, इसलिए अमेरिका ने इस बार "हमलों का वॉल्यूम बढ़ा दिया है।"

अधर में लटकी शांति वार्ता
इस भीषण हमले के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अंतरिम समझौता ज्ञापन (MoU) खत्म हो गया है, लेकिन वे बातचीत जारी रखने की अनुमति देंगे। इसके अलावा वाशिंगटन ने ईरानी तेल की बिक्री को अधिकृत करने वाला लाइसेंस भी रद्द कर दिया है।

दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत फिलहाल रुक गई है। माना जा रहा है कि अब यह बातचीत 9 जुलाई को होने वाले अली खामेनेई के दफन के बाद ही आगे बढ़ सकेगी। ज्ञात हो कि खामेनेई इसी साल 28 फरवरी को हुए अमेरिकी-ईरानी हवाई हमलों में मारे गए थे।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया: "करारा जवाब मिलेगा"
ईरान के सैन्य मुख्यालय 'खातम-अल-अंबिया' ने इस अमेरिकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए इसे 'खुली आक्रामकता' करार दिया है। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि वे इसका "करारा जवाब" देंगे और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के प्रबंधन में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेंगे। सेना ने साफ कहा कि इस रूट से गुजरने वाले जहाजों के लिए केवल ईरान द्वारा तय किया गया रास्ता ही सुरक्षित है।

ईरानी संसद के अध्यक्ष और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बगेर गालिबफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "यह अमेरिका द्वारा किया गया MoU का बड़ा उल्लंघन है। दक्षिणी ईरान पर हमले और तेल प्रतिबंधों को दोबारा थोपकर डराने-धमकाने का दौर अब खत्म हो चुका है। हम झुकने वाले नहीं हैं।"

बीच में दौरा छोड़ वतन लौटे ईरानी राष्ट्रपति
इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन जो पूर्व सर्वोच्च नेता खामेनेई के अंतिम संस्कार के सिलसिले में इराक के नजफ शहर में थे, वे अपना दौरा बीच में ही छोड़कर तेहरान के लिए रवाना हो गए हैं।

दूसरी तरफ, ईरान के नए सर्वोच्च नेता और खामेनेई के बेटे, आयतुल्ला मोजतबा खामेनेई अभी तक इन रस्मों में कहीं नजर नहीं आए हैं। माना जा रहा है कि वे किसी गुप्त स्थान पर छिपे हुए हैं, क्योंकि अपने पिता की मौत वाले हवाई हमले में वे भी घायल हो गए थे।

ट्रंप का गुस्सा: ‘Iran US समझौता अब पूरी तरह खत्म!
ईरान ने सिर्फ नियम ही नहीं बदले, बल्कि उसने पिछले कुछ दिनों में होर्मुज के पास तीन बड़े तेल टैंकर जहाजों पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमला भी कर दिया. बस फिर क्या था, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया. ट्रंप ने तुर्की में चल रहे नाटो समिट के दौरान साफ कह दिया, ‘जहां तक मेरा सवाल है, यह समझौता अब पूरी तरह खत्म हो चुका है. इन लोगों से बात करना सिर्फ टाइम वेस्ट करना है. मुझे ये लोग बिल्कुल पसंद नहीं हैं। 

ट्रंप के इस बयान के तुरंत बाद अमेरिका ने ईरान पर लगे उन प्रतिबंधों की छूट को वापस ले लिया, जिसके तहत ईरान अपना तेल बेच पा रहा था. अमेरिका ने साफ कर दिया कि ईरान की बदतमीजी अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 

आधी रात को दहला ईरान, अमेरिका ने बरसाए बम
ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बिना एक पल गंवाए ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला शुरू कर दिया. अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने मिलकर ईरान के तटीय ठिकानों पर 80 से ज्यादा ठिकानों को बमबारी करके उड़ा दिया. ईरान के बंदर अब्बास, बुशहर, जहां ईरान का परमाणु पावर प्लांट है और केश्म आइलैंड जैसे इलाके लगातार हो रहे धमाकों से दहल उठे। 

अमेरिका ने ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, राडार साइट्स और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की 60 से ज्यादा लड़ाकू नावों को समंदर में ही दफन कर दिया. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ये हमला ईरान की उस ताकत को कुचलने के लिए था, जिसके दम पर वो अंतरराष्ट्रीय व्यापार को रोकने की गुस्ताखी कर रहा था। 

ईरान ने दागीं मिसाइलें, कुवैत और बहरीन में हड़कंप
अमेरिकी बमबारी से तिलमिलाए ईरान ने भी तुरंत पलटवार किया. ईरान की IRGC ने आधी रात को बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेस को निशाना बनाकर दर्जनों बैलिस्टिक मिसाइलें और सुसाइड ड्रोन दाग दिए. बहरीन और कुवैत के आसमान में आधी रात को सायरन गूंजने लगे और उनके एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गए. कुवैत की सेना ने दावा किया है कि उन्होंने ईरान की तरफ से आ रही एक दर्जन से ज्यादा मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया लेकिन इस जवाबी हमले ने साबित कर दिया है कि ईरान अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है और वो खाड़ी देशों को भी इस महायुद्ध में घसीटने से पीछे नहीं हटेगा। 

नेतन्याहू की आंखें लाल
इस पूरी जंग के बीच जो सबसे खतरनाक खिलाड़ी है, वो है इजरायल. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले दिन से ईरान के परमाणु ठिकानों को तबाह करने का मौका ढूंढ रहे थे. जैसे ही ट्रंप ने सीजफायर कैंसिल होने का ऐलान किया, इजरायली मीडिया ने एक बेहद चौंकाने वाली खबर लीक कर दी. इजरायली मीडिया के मुताबिक, नेतन्याहू ने अपनी वॉर कैबिनेट के साथ मिलकर ईरान पर एक ‘फाइनल और विनाशकारी अटैक’ का प्लान लीक कर दिया है। 

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