पंजाब में DA बकाया पर सरकार घिरी, हाईकोर्ट की समयसीमा खत्म; कर्मचारियों का आंदोलन और तेज

चंडीगढ़ 

पंजाब में कर्मचारियों को DA जारी करने के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की डेडलाइन का आज आखिरी दिन है। सरकार ने अभी तक कोर्ट के आदेश के अनुसार DA जारी नहीं किया है। सरकार के रवैये से मुलाजिमों में भारी रोष है।
पंजाब स्टेट मिनिस्टीरियल सर्विसेज यूनियन आज से दो दिन की 'कलम छोड़ व कंप्यूटर शटडाउन' स्ट्राइक पर चले गए हैं। आज और कल पंजाब भर में क्लेरिकल स्टाफ काम नहीं करेगा, जिससे लोगों के काम अटक जाएंगे।

यूनियन नेताओं ने साफ कर दिया कि अगर सरकार ने कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया और यूनियन की अन्य मांगों को नहीं माना, तो हड़ताल आगे भी बढ़ाई जा सकती है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में जनता की परेशानी फिर से बढ़ने वाली है।

PSMSU के नेताओं ने हड़ताल के लिए दिए ये तर्क, जानिए…
    15 दिन हुए, डीए नहीं दिया: यूनियन के प्रदेश पदाधिकारी तेजिंदर सिंह नंगल का कहना है कि हाईकोर्ट ने 3 अगस्त को अपने फैसले में सरकार को आदेश दिए थे कि 15 दिन में कर्मचारियों को डीए जारी किया जाए। उन्होंने कहा कि 3 अगस्त से आज 15वां दिन है, लेकिन सरकार ने अभी तक डीए जारी नहीं किया है। जिसके विरोध में यूनियन ने दो दिन हड़ताल का फैसला किया है।

    चंडीगढ़ रैली के बाद सरकार चुप: तेजिंदर सिंह नंगल ने कहा कि 7 अगस्त को पंजाब भर से सरकारी मुलाजिम चंडीगढ़ में जुटे और वहां पर धरना दिया। पुलिस ने मुलाजिमों पर बल प्रयोग किया और उसके बाद मुख्यमंत्री ने मीटिंग का टाइम दिया। उन्होंने बताया कि सीएम ने 27 अगस्त को मीटिंग का टाइम दिया, जो कि बहुत लंबा है। वे डिमांड कर रहे थे कि उन्हें जल्दी से जल्दी समय दिया जाए। उनका कहना है कि 7 अगस्त से अब तक सरकार ने मुलाजिमों के साथ कोई संपर्क तक नहीं किया।

    वित्त मंत्री के बयान से नाराज: तेजिंदर सिंह नंगल का कहना है कि चंडीगढ़ रैली के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कर्मचारी संगठनों को 'एंटी स्टेट यूनियन' कहा, जिससे कर्मचारियों में भारी रोष है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी सूबे की तरक्की के लिए काम कर रहे हैं और सरकार के जिम्मेदार मंत्री उन्हें एंटी स्टेट कह रहे हैं।

    मांगें नहीं मानी तो बढ़ाएंगे हड़ताल: तेजिंदर सिंह नंगल का कहना है कि यूनियन की डिमांड है कि सरकार हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक आज ही मुलाजिमों का डीए जारी करे। मुख्यमंत्री के साथ जो 27 तारीख की मीटिंग फिक्स हुई है, उसे जल्दी करे और हरपाल चीमा ने जो बयान दिया है, उसे वापस लें। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने मांगें नहीं मानीं, तो हड़ताल 18 तारीख से आगे भी बढ़ाई जा सकती है।

हड़ताल का पब्लिक के कामकाज पर होगा यह असर, जानिए…

    जमीन-जायदाद से जुड़े काम: तहसीलों में जमीन-जायदाद से जुड़े कई महत्वपूर्ण कामों पर हड़ताल का असर पड़ सकता है। रजिस्ट्री, इंतकाल, फर्द-जमाबंदी, जमीन के रिकॉर्ड में नाम या विवरण में बदलाव और राजस्व विभाग की फाइलों की प्रोसेसिंग बंद है। जिन लोगों ने जमीन की खरीद-फरोख्त या रिकॉर्ड में बदलाव के लिए आवेदन किया है, उनकी फाइल आगे बढ़ने में समय लग सकता है। इससे जमीन संबंधी दस्तावेजों की प्रक्रिया भी प्रभावित होगी।

    सर्टिफिकेट बनवाने का काम: सरकारी कार्यालयों से मिलने वाले विभिन्न प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। आय प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, निवास या डोमिसाइल प्रमाणपत्र सहित अन्य दस्तावेजों की जांच और वेरिफिकेशन में देरी हो सकती है। कई मामलों में ऑनलाइन आवेदन होने के बावजूद उसकी अंतिम जांच या प्रमाणपत्र जारी करने का काम कार्यालय के क्लेरिकल स्टाफ से जुड़ा होता है। ऐसे आवेदनों का निपटारा प्रभावित होने की संभावना है।

    RTO से जुड़े काम: ट्रांसपोर्ट विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस और वाहनों से संबंधित कई सेवाओं की कार्यालयी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ड्राइविंग लाइसेंस, RC, वाहन ट्रांसफर, परमिट और अन्य दस्तावेजों से जुड़े आवेदनों की जांच और फाइल प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है। ऑनलाइन आवेदन करने वाले लोगों को भी उन प्रक्रियाओं के लिए इंतजार करना पड़ सकता है, जिनमें दस्तावेजों की मैनुअल जांच या कार्यालय स्तर पर फाइल आगे बढ़ाने की जरूरत होती है।

    पेंशन से जुड़े काम: सामाजिक सुरक्षा विभाग की विभिन्न पेंशन योजनाओं से जुड़े काम भी प्रभावित होने की संभावना है। बुजुर्ग, विधवा, दिव्यांग और अन्य पात्र लाभार्थियों की पेंशन से संबंधित फाइलों की जांच, रिकॉर्ड में सुधार और नए मामलों की प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है। जिन लाभार्थियों के दस्तावेजों में कोई कमी है या जिनके मामलों में कार्यालय स्तर पर वेरिफिकेशन जरूरी है, उनके काम का निपटारा हड़ताल के दौरान धीमा पड़ सकता है।

    सरकारी कर्मचारियों के काम: सरकारी विभागों में काम करने वाले कर्मचारियों से जुड़े कई प्रशासनिक काम भी प्रभावित होंगे। सर्विस बुक अपडेट, छुट्टी, वेतन, एरियर, प्रमोशन, ट्रांसफर और अन्य सेवा संबंधी मामलों की फाइलें क्लेरिकल स्टाफ के जरिए आगे बढ़ती हैं। हड़ताल के कारण इन फाइलों की एंट्री, दस्तावेजों की जांच और संबंधित अधिकारी तक फाइल पहुंचाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इससे कर्मचारियों के कई मामलों में फैसला लेने में देरी संभव है।

    खाद्य एवं राशन से जुड़े काम: खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में राशन कार्ड और लाभार्थियों से जुड़े कई कार्यालयी काम प्रभावित हो सकते हैं। राशन कार्ड में नाम जोड़ने या हटाने, पते में बदलाव, परिवार के सदस्यों का विवरण अपडेट करने और लाभार्थी रिकॉर्ड में संशोधन जैसे कामों में देरी हो सकती है। ऑनलाइन आवेदन होने के बावजूद कई मामलों में दस्तावेजों की जांच और रिकॉर्ड अपडेट कार्यालय स्तर पर किया जाता है। इसलिए हड़ताल का असर इन सेवाओं पर भी पड़ सकता है।

    DC और SDM ऑफिस के काम: DC और SDM कार्यालयों में आम लोगों से जुड़े कई प्रशासनिक काम क्लेरिकल स्टाफ की फाइल प्रोसेसिंग पर निर्भर होते हैं। आवेदन की एंट्री, दस्तावेजों की जांच, रिकॉर्ड अपडेट, विभिन्न प्रमाणपत्रों की प्रक्रिया और दूसरी प्रशासनिक फाइलों को संबंधित अधिकारी तक पहुंचाने का काम प्रभावित हो सकता है। अधिकारी कार्यालय में मौजूद रहने के बावजूद यदि फाइल तैयार करने या रिकॉर्ड अपडेट करने वाला स्टाफ हड़ताल पर है, तो मामलों के निपटारे में देरी हो सकती है।

    नगर निगम और नगर निकाय के काम: नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में भी क्लेरिकल स्टाफ की हड़ताल का असर कई सेवाओं पर पड़ सकता है। प्रॉपर्टी टैक्स, विभिन्न NOC, बिल्डिंग से संबंधित फाइलें, प्रॉपर्टी रिकॉर्ड और अन्य प्रशासनिक आवेदनों की प्रोसेसिंग धीमी हो सकती है। जिन मामलों में आवेदन के बाद दस्तावेजों की जांच, रिकॉर्ड में एंट्री या अधिकारी के पास फाइल भेजने की जरूरत होती है, उनमें देरी की संभावना ज्यादा रहेगी। इससे लोगों को अपने काम के लिए दोबारा कार्यालय आना पड़ सकता है।

    सेहत विभाग का कामकाज भी प्रभावित: सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की नियमित चिकित्सा सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं, लेकिन क्लेरिकल स्टाफ की हड़ताल के कारण अस्पतालों और सेहत विभाग के कार्यालयी काम प्रभावित होने की आशंका है। कर्मचारियों की छुट्टी, वेतन, सर्विस रिकॉर्ड, मेडिकल बिल, विभागीय भुगतान, सरकारी योजनाओं से जुड़े रिकॉर्ड और दवाइयों व सामान की खरीद से संबंधित फाइलों की प्रोसेसिंग में देरी हो सकती है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों से जुड़े प्रशासनिक दस्तावेज, रिकॉर्ड अपडेट और दूसरे क्लेरिकल काम भी प्रभावित हो सकते हैं।

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