एंटी बेअदबी कानून पर पंजाब सरकार अडिग: CM मान बोले- फैसला नहीं बदलेगा

चंडीगढ़.

पंजाब सरकार द्वारा बेअदली के खिलाफ कानून लाया गया है। वहीं इस कानून के लेकर श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह ने 15 दिन अल्टीमेटम दिया था कि पंजाब सरकार इस कानून से उन प्रावधानों को हटाए जो गुरु ग्रंथ साहिब, खालसा पंथ और सिख समुदाय की भावनाओं के खिलाफ है।  

इसे लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि सरकार किसी भी कीमत पर इस कानून को वापस नहीं लेगी और न ही इसमें कोई बदलाव किया जाएगा। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि पूरे पंथ को ये सख्त कानून मंजूर है पर सिर्फ एक खास परिवार को ये पसंद नहीं आया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में लंबे समय से शरारती तत्व धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली घटनाओं को अंजाम देते रहे हैं, लेकिन उचित और सख्त कानून नहीं होने के कारण वे बच निकलते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं चलेगा। अब आम आदमी पार्टी की सरकार ने ऐसा मजबूत कानून तैयार किया है जिसके तहत गुरु साहिब की बेअदबी करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने श्री हरमिंदर साहिब में नतमस्तक होकर जागत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार संशोधन एक्ट-2026 को लागू करने की समझ और शक्ति प्रदान करने के लिए परमात्मा का धन्यवाद किया। उन्होंने इस कानून को बेअदबी करने की कोशिश करने वालों के लिए सख्त सजा सुनिश्चित करने तथा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की मान-मर्यादा की रक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। श्री हरमिंदर साहिब में नतमस्तक होने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि बेअदबी के खिलाफ सख्त कानून बनाने की सेवा सौंपने के लिए उनका दिल परमात्मा के प्रति शुक्राने से भरा हुआ है। हमारी सरकार सौभाग्यशाली है कि हमें यह ऐतिहासिक कानून पारित करने का अवसर मिला है, जो भविष्य में ऐसी घिनौनी घटनाओं को रोकने में अहम साबित होगा।

हाईकोर्ट में रद्द हुई याचिका
संबोधन के दौरान सीएम ने एक महत्वपूर्ण कानूनी जीत का भी जिक्र किया और बताया कि कांग्रेस और अकाली दल के बहकावे में आकर एक व्यक्ति ने इस सख्त कानून के खिलाफ पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।हाईकोर्ट ने न केवल उस याचिका को रद्द किया, बल्कि याचिकाकर्ता पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून को अब कोई भी चुनौती देकर रद्द नहीं करवा सकता, क्योंकि इसे सरकार द्वारा लागू करने के बाद राज्यपाल ने भी अपनी मंजूरी दे दी है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button