SIR पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का हमला, केंद्र की भूमिका पर उठाए सवाल

चंडीगढ़.

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में अब एक नई व्यवस्था देखने को मिल रही है, जिसमें लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुए तानाशाह बन रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यदि मतदाताओं की वोट ही काट दी जाए और लोगों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने का अवसर न मिले तो लोकतंत्र का क्या अर्थ रह जाता है। बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर के संविधान का हवाला देते हुए मान ने कहा कि वोट का अधिकार ही नहीं बचेगा तो संविधान की भावना कहां रह जाएगी।मुख्यमंत्री ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि मतदाता सूचियों में वोट काटने और नए वोट बनाने के आरोप लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं।

SIR क्या है और पंजाब के लिए इसकी टाइमलाइन क्या है?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग (ECI) द्वारा चलाया जा रहा एक विशेष अभियान है जिसका उद्देश्य मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) को अपडेट करना और उसमें दर्ज जानकारी का वेरिफिकेशन करना है। इस अभियान के तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी की जांच कर रहे हैं और उनसे एन्यूमरेशन फॉर्म भरवा रहे हैं। पंजाब में यह अभियान 25 जून से शुरू हुआ था और 24 जुलाई तक घर-घर सत्यापन का काम जारी रहेगा। इसके बाद 3 अगस्त को मतदाता सूची का प्रारूप (ड्राफ्ट) जारी किया जाएगा। यदि किसी को कोई आपत्ति या सुधार कराना होगा तो वह 2 सितंबर तक दावा या आपत्ति दर्ज करा सकेगा। इसके बाद 1 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। चुनाव आयोग ने पंजाब में 2.14 करोड़ से अधिक मतदाताओं के सत्यापन के लिए 24000 से ज्यादा बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की तैनाती की है। इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को अपनी व्यक्तिगत जानकारी की पुष्टि करनी होगी और जरूरत पड़ने पर निर्धारित फॉर्म के साथ आवश्यक दस्तावेज भी जमा करने होंगे। चुनाव आयोग का कहना है कि इस अभियान का मकसद भविष्य के चुनावों के लिए सटीक और अपडेटेड मतदाता सूची तैयार करना है।

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