राइजिंग राजस्थान को रफ्तार देने की तैयारी, 10 दिसंबर तक ज्यादा से ज्यादा निवेश प्रोजेक्ट्स धरातल पर लाने का लक्ष्य

जयपुर
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राइजिंग राजस्थान के माध्यम से प्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है। उन्होंने अधिकारियों को मुख्यमंत्री की मंशानुरूप आगामी 10 दिसंबर को प्रवासी राजस्थानी दिवस तक अधिकाधिक एमओयू ग्राउंड ब्रेकिंग के लक्ष्य की दिशा में प्रभावी एवं समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए।

मुख्य सचिव सोमवार को शासन सचिवालय में आयोजित राइजिंग राजस्थान इन्वेस्टमेंट समिट के दौरान हुए एमओयू की प्रगति एवं उनके क्रियान्वयन की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न विभागों से संबंधित लंबित प्रकरणों की स्थिति की जानकारी लेते हुए इनके त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि निवेश परियोजनाओं से संबंधित आवश्यक प्रस्ताव एवं फाइलें शीघ्र प्रस्तुत की जाएं। साथ ही, संबंधित जिला कलक्टरों के साथ सतत समन्वय स्थापित कर परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से ऊर्जा एवं राजस्व विभाग से अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

मुख्य सचिव ने भूमि संबंधी प्रकरणों के त्वरित निस्तारण को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भूमि की पहचान एवं आवंटन से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान किया जाए, ताकि निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब न हो और परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग शिखर अग्रवाल ने विभागवार प्रगति की जानकारी देते हुए बताया कि राइजिंग राजस्थान के अंतर्गत 35 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव विभिन्न चरणों में हैं। इनमें 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है

उन्होंने कहा कि आगामी लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जिन प्रकरणों में स्वीकृति दी जानी है, उनमें अनावश्यक विलंब न हो और उन्हें शीघ्र अनुमोदित किया जाए। वहीं, जिन प्रकरणों में स्वीकृति संभव नहीं है, उनमें भी तत्काल निर्णय लेकर उन्हें लंबित न रखा जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करते हुए अनावश्यक रूप से कोई प्रकरण लंबित नहीं रखा जाए। बैठक में विभागवार निर्धारित लक्ष्यों एवं उनके विरुद्ध अर्जित प्रगति की समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि निवेश प्रस्तावों से जुड़े प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई में तेजी लाई जाए।

 

 

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