पंजाब में ‘मानसा चलो’ अभियान से पहले पुलिस की कार्रवाई, अकाली दल के कई नेताओं को किया नजरबंद

अमृतसर/फतेहगढ़ साहिब.

मानसा जिले में मंगलवार को हुए लाठीचार्ज के बाद अकाली दल वारिस पंजाब द्वारा दिए गए 'मानसा चलो' के आह्वान को लेकर पुलिस और प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है।

जिले के भीतर कानून व्यवस्था और शांति का माहौल बनाए रखने का हवाला देते हुए पुलिस ने मंगलवार देर रात और बुधवार तड़के एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इसके तहत पार्टी के कई प्रमुख स्थानीय नेताओं को उनके घरों के भीतर ही नजरबंद यानी हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। पुलिस प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य अकाली दल वारिस पंजाब के नेताओं और उनके समर्थकों को किसी भी कीमत पर मानसा पहुंचने से रोकना है।

कई नेताओं को घरों में रोका
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की विभिन्न टीमों ने पार्टी के जिला उपाध्यक्ष नवदीप तान, कोर कमेटी के पूर्व सदस्य हरप्रीत सिंह भंगू और वरिष्ठ नेता लखबीर सिंह सौंटी को उनके घरों में ही नजरबंद कर दिया है। इन सभी नेताओं के घरों के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि वे किसी भी स्थिति में मानसा के लिए रवाना न हो सकें। इस बीच, इस पूरी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए पार्टी के जिला प्रधान लखबीर सिंह कोटला ने बताया कि पुलिस मंगलवार देर शाम उनके निवास स्थान पर भी दबिश देने के लिए पहुंची थी। हालांकि, उस समय वे अपने घर पर मौजूद नहीं थे, जिसके चलते पुलिस उन्हें नजरबंद करने में सफल नहीं हो सकी। कोटला ने कड़ा रोष जताते हुए आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार और प्रशासन लोकतंत्र में शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने और एक मंच पर एकत्र होने के मौलिक अधिकारों को दबाने का कुचक्र चला रहे हैं।

शमशेर सिंह पधरी भी हुए नजरबंद
दूसरी ओर, परविंदर सिंह झोटा की संदिग्ध हत्या के मामले में इंसाफ की मांग को लेकर मानसा में चल रहे मोर्चे में शामिल होने से रोकने के लिए पुलिस ने पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी शमशेर सिंह पधरी को भी अमृतसर स्थित उनके आवास पर बुधवार सुबह करीब साढ़े पांच बजे हाउस अरेस्ट कर लिया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस मोर्चे के दौरान लखा सिधाना और अन्य सिखों की गिरफ्तारी के विरोध में मानसा पहुंचने की पूरी योजना बनाई थी। पधरी ने पुलिस की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हुए आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों का गला घोट रही है।

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