हरियाणा में गोशालाओं की संख्या 3 गुना बढ़ी, 12 साल में बजट 300 गुना हुआ

चंडीगढ़.

हरियाणा में वर्ष 2014 से पहले केवल 200 गोशालाएं थीं और उनका वार्षिक बजट मात्र दो करोड़ रुपये था। वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं के फलस्वरूप आज प्रदेश में गोशालाओं की संख्या बढ़कर 650 हो चुकी है, जबकि इनका बजट बढ़ाकर रिकॉर्ड 600 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

इन गोशालाओं में वर्तमान में चार लाख से अधिक बेसहारा गोवंश की देखभाल की जा रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को पंजाब के जिला पटियाला स्थित समाना में आयोजित गोकथा में यह जानकारी दी। हिंद की चादर श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस को समर्पित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि प्रदेश की 350 गोशालाओं में विशाल शेड और सौर ऊर्जा (सोलर) प्लांट स्थापित किए गए हैं। नई गोशालाओं की स्थापना हेतु जमीन की रजिस्ट्री पर लगने वाली एक प्रतिशत स्टांप ड्यूटी को पूर्णतः समाप्त कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा सरकार ने युवाओं को नशे की सामाजिक बुराई से बचाने के लिए बड़ा अभियान चला रखा है। नशे के सौदागरों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है। पंजाब सरकार की अनदेखी के कारण यहां का युवा नशे की गिरफ्त में फंसता जा रहा है, जबकि हरियाणा में युवाओं को मैदानों से जोड़ने के लिए 2000 खेल नर्सरियां स्थापित की गई हैं। इनमें प्रतिदिन लगभग 40 लाख युवा अभ्यास करते हैं। खेल नीति का परिणाम है कि हाल ही में कामनवेल्थ गेम्स में भारत द्वारा जीते गए कुल 39 मेडल (13 गोल्ड) में से अकेले हरियाणा के खिलाड़ियों ने सात गोल्ड मेडल हासिल किए। गर्व की बात यह है कि पांच स्वर्ण पदक हरियाणा की बेटियों ने अपने नाम कर देश और प्रदेश का नाम विश्व पटल पर रोशन किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने अभूतपूर्व प्रगति की है। सड़क और रेल कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं तथा रिकॉर्ड संख्या में नए मेडिकल कॉलेज , यूनिवर्सिटी, आइआइटी और आइआइएम खोले गए हैं। राज्य के 22 में से 17 जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हो चुके हैं। वर्ष 2014 से पूर्व हरियाणा को प्रतिवर्ष केवल 500 डाक्टर मिलते थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर 3000 प्रतिवर्ष हो गई है। इसके साथ ही हरियाणा में युवाओं को बिना किसी खर्ची-पर्ची के पूर्ण पारदर्शिता से सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं, जबकि पड़ोसी राज्य पंजाब में युवाओं के साथ नौकरियों के वितरण में लगातार भेदभाव किया जा रहा है।

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