1857 के क्रांतिकारियों की धरती मंगाली, 500 बलिदानों की यादें; फिर भी मूलभूत सुविधाओं का इंतजार

हिसार
हिसार से करीब 15 किलोमीटर दूर नलवा विधानसभा क्षेत्र में बसा मंगाली केवल आबादी के लिहाज से बड़ा गांव नहीं है, बल्कि इसकी मिट्टी में इतिहास की कई परतें दफन हैं

वर्ष 1488 में अस्तित्व में आए इस गांव का इतिहास 1857 की क्रांति से भी जुड़ा है। आज भी गांव में उस दौर की वीरगाथाएं और बलिदानियों की यादें लोगों के बीच जीवंत है।

समय के साथ गांव का विस्तार हुआ और यह मंगाली आकलान, मंगाली झारा, मंगाली सुरतिया, मंगाली मोहब्बत और ढाणी जाटान नाम से पांच पंचायतों में बंट गया। पांचों पंचायतों की आबादी 20 हजार से अधिक है। दूसरी सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान है मनके का व्यापार।

मंगाली की बसावट को लेकर ग्रामीणों में प्रचलित मान्यता के अनुसार गांव का नाम एक परिवार के चार बेटों के नाम पर पड़ा। शुरुआत में चार पंचायतें बनीं और बाद में ढाणी जाटान को वर्ष 1986 में अलग पंचायत का दर्जा मिला।

मंगाली की चार पुरानी पंचायतों को अस्तित्व में आए सौ वर्ष से अधिक समय बीत चुका है। गांव के विस्तार के साथ आबादी बढ़ती गई, लेकिन मूलभूत सुविधाओं का ढांचा उस गति से विकसित नहीं हो पाया।

तीन दशक पहले बिछी पानी की लाइन, समस्या आज भी बरकरार
गांव में पेयजल की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 30 वर्ष पहले गांव में पानी की लाइन बिछाई गई थी और जलघर भी बनाए गए, लेकिन बढ़ती आबादी के साथ पानी की जरूरत भी बढ़ती गई।

ऐसे में मौजूदा व्यवस्था ग्रामीणों की जरूरत पूरी करने में पूरी तरह सक्षम नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के कई हिस्सों में पर्याप्त और नियमित पेयजल आपूर्ति की जरूरत महसूस होती है।

गंदे पानी की निकासी नहीं, तालाब में पसरी गंदगी
मंगाली में दूसरी बड़ी समस्या गंदे पानी की निकासी की है। गांव से निकलने वाले गंदे पानी की उचित निकासी नहीं होने के कारण कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनती है।

गांव के तालाब भी गंदगी से अछूते नहीं हैं। तालाबों की सफाई और पानी की निकासी की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसात के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

मुख्य सड़क की बदहाली भी बनी परेशानी
गांव की मुख्य सड़क की स्थिति भी ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय है। मंगाली की पांच पंचायतों में बड़ी आबादी होने के कारण यहां दिनभर लोगों और वाहनों की आवाजाही रहती है। इसके बावजूद सड़क की हालत बेहतर नहीं होने से आवागमन प्रभावित होता है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सड़क, पेयजल और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं पर प्राथमिकता से काम होना चाहिए।

मंगाली की फुटबाल की अलग पहचान
मंगाली आकलान में गांव की खास पहचान फुटबाल से भी है। यहां के करीब 35 खिलाड़ी राष्ट्रीय और प्रदेश स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं। गांव में शहीदी स्मारक भी प्रमुख पहचान है।

1857 में हिसार जेल पर बोला था धावा
मंगाली के इतिहास में वर्ष 1857 का दौर विशेष महत्व रखता है। ग्रामीणों के अनुसार, उस समय गांव के क्रांतिकारियों ने हिसार जेल पर धावा बोला था। इस संघर्ष में 12 अंग्रेज अधिकारी के मारे गए थे।

इसके बाद अंग्रेजों ने गांव पर हमला किया। दमन से बचने के लिए 30 से अधिक देशभक्तों ने मंगाली मोहब्बत में बने एक कुएं में छलांग लगा दी थी। यह कुआं आज भी मंगाली मोहब्बत में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के सामने मौजूद है।

वहीं स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के नाम पर मंगाली आकलान में शहीद स्मारक भी बनाया गया है। स्वतंत्रता संग्राम में गांव के करीब 500 लोगों की कुर्बानी का उल्लेख भी ग्रामीण करते हैं। यही कारण है कि मंगाली की पहचान आज भी एक ऐतिहासिक गांव के रूप में बनी हुई है।

ढाणी जाटान में सरकारी जमीन का अभाव
वर्ष 1986 में पंचायत बनी ढाणी जाटान में करीब 300 मकान और लगभग 1700 की आबादी है। पूनम देवी सरपंच हैं। पंचायत के सामने सबसे बड़ी समस्या सरकारी भूमि की कमी है। गांव के पास उपलब्ध करीब एक किला सरकारी जमीन पर आंगनबाड़ी केंद्र समेत अन्य सरकारी भवन बन चुके हैं। ऐसे में भविष्य में अन्य सरकारी परियोजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता चुनौती बनी हुई है।

शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं बेहतर
मंगाली की पांच पंचायतों में ग्रामीणों को शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। गांव में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और करीब 10 राजकीय प्राथमिक विद्यालय हैं। स्वास्थ्य सुविधा के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मौजूद है। इसके अलावा दो वाटर वर्क्स, लाइब्रेरी, एक गोशाला और पुलिस चौकी भी गांव की प्रमुख सुविधाओं में शामिल है।

 

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