झारखंड: शिक्षकों के हित में हाईकोर्ट का अहम फैसला, सरकार को समयसीमा में निर्णय का निर्देश

रांची

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने एक महत्वपूर्ण आदेश में राज्य के प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षकों को एमएसीपी योजना का लाभ दिए जाने के मामले में सरकार को 16 सप्ताह के भीतर अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है। एकल पीठ ने जामताड़ा जिले के 84 शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त आदेश पारित किया है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स और शिवम पाठक ने अदालत को बताया कि राज्य के अन्य स्कूलों (जैसे अल्पसंख्यक स्कूल, आवासीय विद्यालय) तथा बिहार राज्य के शिक्षकों को एमएसीपी का लाभ पहले से दिया जा रहा है, जबकि प्राथमिक स्कूलों के शिक्षकों को यह सुविधा नहीं मिल पाई है।

याचिका में राज्य सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वे इन शिक्षकों को भी एमएसीपी का लाभ दें। अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि सरकार ने सात अगस्त 2024 को झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ को पत्र लिखकर एमएसीपी की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया था, लेकिन उसके बाद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

कोर्ट ने कहा कि चूंकि अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को यह लाभ मिल रहा है और सरकार ने इस विषय पर विचार-विमर्श शुरू भी कर दिया है, इसलिए यह आवश्यक है कि प्राथमिक शिक्षकों के संबंध में भी जल्द से जल्द फैसला लिया जाए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सरकार इस मामले में अंतिम निर्णय लें। पूरी प्रक्रिया इस आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 16 सप्ताह के भीतर पूरी की जाए। अदालत ने याचिका निष्पादित कर दी।

16,290 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन देने का आदेश
हाई कोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने पूर्वी सिंहभूम जिले के 80 प्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षकों की याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें 16,290 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन देने का आदेश दिया है। याचिकाकर्ता मैट्रिक और इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक हैं, जिन्होंने वर्ष 2006 से पहले सेवा में आए थे।

उनकी मांग थी कि छठें वेतन आयोग की संस्तुतियों के तहत जारी वित्त विभाग के प्रस्ताव के अनुसार उनका प्रारंभिक वेतन एक जनवरी 2006 से 16,290 रुपये निर्धारित किया जाए। शिक्षकों ने शिक्षा विभाग के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके दावे को यह कहते हुए खारिज कर दिया गया था कि यह वेतनमान केवल झारखंड सचिवालय के सहायकों पर लागू होता है।

अदालत ने इस तर्क को खारिज कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि यह मामला पूर्व में एक मामले में कोर्ट के निर्णय (27 नवंबर 2025) से पूरी तरह आच्छादित है। अदालत ने शिक्षकों के पक्ष में निर्णय सुनाते हुए विभाग के 10 जून 2024 के सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया।

अदालत ने राज्य को निर्देश दिया कि वह इन याचिकाकर्ताओं को वही, लाभ प्रदान करे जो पिछले मामले के याचिकाकर्ताओं को दिए गए थे। सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पिछले संबंधित मामले के निर्णय के खिलाफ सरकार ने खंडपीठ में अपील दायर कर दी है।

इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि अपील के आदेश से शिक्षकों न्यूनतम वेतनमान प्रभावित होगा। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अभिजीत कुमार सिंह ने पक्ष रखा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button