1930 हेल्पलाइन पर तुरंत कार्रवाई, साइबर अपराध रोकने की नई रणनीति

 जयपुर
राज्य में साइबर सुरक्षा तंत्र को और सुदृढ़ बनाने तथा आमजन के धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में मंगलवार को शासन सचिवालय में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की विशेष साइबर समन्वय बैठक आयोजित की गई।

बैठक में मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा तथा राजस्थान पुलिस एवं प्रमुख बैंकों के अधिकारियों ने भाग लेकर साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की रोकथाम हेतु ठोस एवं परिणाम-मूलक रणनीति तय की।

मुख्य सचिव ने कहा कि बैंकों को 'जीरो टाइम लैग' का लक्ष्य लेकर कार्य करना होगा। हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत मिलते ही बैंकों की प्रतिक्रिया तीव्र होनी चाहिए तथा नागरिक की शिकायत और खाता होल्ड की कार्रवाई के बीच समय-अंतराल नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में दस में से मात्र एक मामले में ही बैंकों की त्वरित प्रतिक्रिया से राशि रुक पाना गंभीर विषय है।

उन्होंने निर्देश दिए कि सभी बैंक अधिकारी स्वयं 1930 कॉल सेंटर का दौरा कर नागरिकों की समस्याओं को नजदीक से समझें और पुलिस के साथ हैंड्स-ऑन समन्वय स्थापित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सामूहिक एवं समयबद्ध प्रयासों से साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा और प्रदेश डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में एक मॉडल राज्य के रूप में उभरेगा।

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा साइबर सुरक्षा एवं म्यूल अकाउंट्स की रोकथाम हेतु समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि राज्य में संचालित संदिग्ध खातों और हॉटस्पॉट बैंक शाखाओं का एक केंद्रीकृत डेटाबेस तैयार किया जाए।

उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर नियमित समन्वय बैठकों से बैंक अधिकारियों और साइबर पुलिस के बीच बेहतर जवाबदेही और तालमेल सुनिश्चित होगा, जिसका सीधा लाभ आमजन को मिलेगा। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों एवं अपराधियों के प्रति राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति, आर4सी के प्रभावी क्रियान्वयन तथा जन-जागरूकता के लिए राजस्थान पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है, ताकि आमजन को साइबर अपराधों की गिरफ्त में आने से बचाया जा सके।

बैंक प्रतिनिधि करेंगे 1930 कॉल सेंटर का दौरा
मुख्य सचिव ने बताया कि निर्देशों की अनुपालना में बुधवार को सभी बैंकों के प्रतिनिधि पुलिस मुख्यालय स्थित 1930 कॉल सेंटर का दौरा करेंगे। इस दौरे के माध्यम से बैंक अधिकारी कॉल सेंटर की कार्यप्रणाली, शिकायत निस्तारण प्रक्रिया तथा नागरिकों की व्यावहारिक कठिनाइयों को नजदीक से समझ सकेंगे, जिससे आगे की कार्यवाही और अधिक प्रभावी एवं त्वरित हो सकेगी।

केवाईसी अपडेट एवं वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा पर विशेष बल
मुख्य सचिव ने कहा कि साइबर ठग प्रायः केवाईसी अपडेट के नाम पर फर्जी कॉल, एसएमएस अथवा लिंक भेजकर आमजन को झांसे में लेते हैं। अतः बैंक ग्राहकों तक केवाईसी संबंधी सूचनाएं केवल सत्यापित माध्यमों से ही पहुंचाई जाएं।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक साइबर ठगी के प्रति सर्वाधिक असुरक्षित हैं। इसलिए बैंक शाखाओं में उनके लिए विशेष सहायता काउंटर स्थापित किए जाएं तथा उन्हें डिजिटल लेन-देन में सतर्कता बरतने के लिए व्यक्तिगत रूप से जागरूक किया जाए।

बैठक में तय की गई प्रमुख पहल
बैठक में निर्णय लिया गया कि वरिष्ठ बैंक अधिकारी एवं नोडल प्रतिनिधि 1930 साइबर कंट्रोल रूम का अवलोकन कर त्वरित खाता होल्डिंग प्रक्रिया को और अधिक सुगम बनाएंगे।

पुलिस मुख्यालय एवं साइबर रिस्पॉन्स सेंटर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, यूको बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक तथा यूनियन बैंक सहित प्रमुख बैंकों के नोडल प्रतिनिधियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।

बिना भौतिक सत्यापन के 10 से 50 करोड़ रुपये तक की सीमा वाले चालू खाते खोलने की परिपाटी पर रोक लगाते हुए संदिग्ध एवं उच्च-जोखिम खातों का सुव्यवस्थित पुनः सत्यापन किया जाएगा।

प्रदेश की 190 चिन्हित हॉटस्पॉट बैंक शाखाओं तथा संदिग्ध एटीएम बिंदुओं पर एआई आधारित निगरानी एवं स्थानीय पुलिस द्वारा औचक निरीक्षण से सतर्कता तंत्र को और मजबूत किया जाएगा।

पीड़ितों को राहत एवं जन-जागरूकता
मनी रिस्टोरेशन मॉड्यूल (MRM) तथा ग्रीवांस रिड्रेसल पोर्टल (GRM) के माध्यम से पीड़ित नागरिकों को 50 हजार रुपये तक की राशि तथा अदालती आदेशों के तहत रोकी गई राशि शीघ्र लौटाने की व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा।

साथ ही, भारी नकद निकासी अथवा फिक्स्ड डिपॉजिट समय से पूर्व तुड़वाने की स्थिति में सुरक्षात्मक सत्यापन व्यवस्था लागू करने तथा खाता किराए पर देने के खतरों के प्रति व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिससे आमजन साइबर ठगी से स्वयं को सुरक्षित रख सकें।

 

 

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