IAS नेहा मीणा की तीसरी पोस्टिंग बनी कलेक्टर की जिम्मेदारी, ऑफिस से ज्यादा फील्ड में रहती हैं एक्टिव

भोपाल
 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के वल्लभ भवन से एक महत्वपूर्ण ट्रांसफर सूची जारी हुई है। इसमें अच्छा काम करने वाले अधिकारियों को जहां अच्छा पद और फील्ड का काम दिया गया है। वहीं, फील्ड में ठीक प्रदर्शन नहीं करने वाले अधिकारियों को भोपाल में बुला लिया गया है। इस सूची में अपनी बेबाक, तेज-तर्रार और परिणामोन्मुखी कार्यशैली के लिए जानी जाने वाली महिला आईएएस अधिकारी नेहा मीणा को देवास जिले का नया कलेक्टर बनाया गया है।

सिवनी से देवास हुआ ट्रांसफर
नेहा मीणा इससे पहले सिवनी जिले की कमान संभाल रही थीं। मध्य प्रदेश के प्रशासनिक इतिहास में यह एक बहुत ही दुर्लभ वाकया माना जा रहा है, जब किसी महिला आईएएस अधिकारी को लगातार तीसरे जिले की पूर्ण कमान सौंपी गई हो। आमतौर पर महिला अधिकारियों को एक जिले की कलेक्ट्री के बाद भोपाल मंत्रालय या अन्य सचिवालयों में भेज दिया जाता है, लेकिन नेहा की मैदानी सक्रियता, पारदर्शिता और शानदार प्रशासनिक परिणामों ने उन्हें यह मुकाम दिलाया है।

2014 बैच की अधिकारी हैं
वर्ष 2014 बैच की आईएएस अधिकारी नेहा मीणा की अब तक की प्रशासनिक यात्रा बेहद प्रेरणादायक रही है। उनकी पहली पोस्टिंग बतौर कलेक्टर जनजातीय बहुल जिले झाबुआ में हुई थी। वहां उन्होंने नवंबर 2024 में बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए एक अनूठा अभियान शुरू किया, जिसका नाम 'मोटी आई' रखा गया। स्थानीय भीली बोली में 'मोटी आई' का मतलब 'बड़ी मां' होता है।

इस अभियान के जरिए उन छोटे बच्चों की विशेष देखभाल की गई, जिनकी माताएं कम उम्र की थीं या रोजगार के लिए पलायन कर जाती थीं। इस बेहतरीन पहल के लिए उन्हें प्रतिष्ठित प्रधानमंत्री पुरस्कार से नवाजा गया था।

इसके अलावा झाबुआ में चुनाव के दौरान वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने के लिए शुरू किए गए सांस्कृतिक मास्कोट 'चुनावी काका' और 'चुनावी काकी' को भी राष्ट्रीय स्तर पर खूब सराहना मिली, जिसके लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया गया। वहीं, नीमच में अतिरिक्त कलेक्टर रहते हुए भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण में उत्कृष्ट कार्य करने पर उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों 'भूमि सम्मान प्लेटिनम अवार्ड' भी मिल चुका है।

ग्रामीण इलाकों का करती हैं दौरा
सिवनी जिले में अपने कार्यकाल के दौरान नेहा मीणा सिर्फ दफ्तर की चार दीवारों तक सीमित नहीं रहीं। वह अक्सर ग्रामीण इलाकों का दौरा करती थीं और खेतों में उतरकर फसलों की स्थिति का खुद जायजा लेती थीं। आम जनता से सीधा संवाद और हर छोटी-बड़ी समस्या का मौके पर समाधान करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा है।

उज्जैन का पड़ोसी जिला है देवास
अब उन्हें व्यापारिक हब इंदौर और धार्मिक नगरी उज्जैन से सीधे जुड़े बेहद अहम और संवेदनशील जिले देवास की कमान सौंपी गई है। यह ट्रांसफर इस मामले में भी खास है क्योंकि उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का गृह जिला है और इंदौर मुख्यमंत्री का प्रभार वाला जिला।

 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button