पंजाब में DA-DR भुगतान न होने पर हाईकोर्ट का सख्त रुख

चंडीगढ़ 

पंजाब सरकार के कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) के भुगतान में देरी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। पूर्व आदेश का पालन नहीं होने और अनुपालन शपथपत्र दाखिल न किए जाने पर अदालत ने पंजाब के मुख्य सचिव को पांच अक्तूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से कोई संरक्षण मिल जाता है तो मुख्य सचिव की व्यक्तिगत पेशी से छूट रहेगी।

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड से जुड़े लंबित डीए-डीआर भुगतान के मामलों की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार पक्षों के बीच समझौते की स्थिति बनने का हवाला दे रही है, जबकि उनकी मांग केवल हाईकोर्ट के आदेश को लागू कराने की है। इस पर खंडपीठ ने कहा कि राज्य को आदेश के खिलाफ अपील करने का अधिकार है, लेकिन कानूनी उपाय का इस्तेमाल कार्यवाही को अनिश्चितकाल तक टालने के लिए नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने तीन अगस्त को पंजाब सरकार और पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड को कर्मचारियों और पेंशनरों के लंबित डीए-डीआर की अद्यतन किस्तें अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को दिए जा रहे केंद्रीय दर के अनुरूप जारी करने का निर्देश दिया था। इसके लिए दो सप्ताह की समय सीमा तय की गई थी। देरी होने पर बकाया राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज देने का भी आदेश था। 

 अदालत को बताया गया कि राज्य ने एक सितंबर को आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी, लेकिन रजिस्ट्री की ओर से बताई गई आपत्तियां अभी तक दूर नहीं की गई हैं। सरकार ने दो सप्ताह का और समय मांगा और कहा कि वह मामले को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास कर रही है। खंडपीठ ने कहा कि एकल पीठ की ओर से बकाया भुगतान के लिए दी गई तीन महीने की समय सीमा भी समाप्त हो चुकी है, लेकिन आदेश का अनुपालन नहीं हुआ।

याचिकाकर्ताओं ने स्वतंत्रता दिवस पर प्रकाशित पूर्ण पृष्ठ के विज्ञापनों का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि कर्मचारियों और पेंशनरों का बकाया लंबित होने के बावजूद ऐसे खर्च सवाल खड़े करते हैं। अदालत पहले ही राज्य को बकाया भुगतान होने तक बड़े पैमाने पर प्रिंट और सोशल मीडिया पर अनुत्पादक विज्ञापन खर्च से बचने को कह चुकी है। अब अनुपालन शपथपत्र दाखिल नहीं किए जाने पर मुख्य सचिव को व्यक्तिगत पेशी के लिए तलब किया गया है।

आदेश के पालन में देरी पर छह फीसदी ब्याज भी
हाईकोर्ट ने तीन अगस्त के आदेश में लंबित डीए-डीआर की अद्यतन किस्तें केंद्रीय दर के अनुरूप जारी करने का निर्देश दिया था। इसके लिए दो सप्ताह का समय दिया गया था। अदालत ने कहा था कि देरी होने पर बकाया राशि पर छह प्रतिशत सालाना साधारण ब्याज देना होगा। इससे पहले एकल पीठ ने बकाया भुगतान के लिए तीन महीने की समय सीमा तय की थी, जो अब समाप्त हो चुकी है।
 
पूर्व आदेश का पालन नहीं होने और अनुपालन शपथपत्र दाखिल न किए जाने पर अदालत ने पंजाब के मुख्य सचिव को पांच अक्तूबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। 

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