47 करोड़ के फायदे के लिए बदली गई तारीख, GMADA जमीन घोटाले में ED की जांच

चंडीगढ़.

मोहाली में सरकारी जमीन के आवंटन के बाद निजी बिल्डर को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने के मामले में गमाडा के अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सेक्टर-62 स्थित फूड कोर्ट साइट के मामले में करीब 47 करोड़ रुपये की देनदारी में राहत देने के लिए आवंटन की प्रभावी तारीख ही बदल दी गई।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में अब यह बात सामने आई है कि इस फैसले के लिए गमाडा के मुख्य अभियंता पर अनुकूल रिपोर्ट तैयार करने का दबाव बनाया गया था। मुख्य अभियंता अजय गर्ग ने ईडी को बताया है कि वरिष्ठ अधिकारियों ने रिपोर्ट में 'आंशिक रूप से व्यवहार्य' शब्द लिखने के लिए उन पर दबाव डाला था। मामला रेमिगेट बिल्ड एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड को आवंटित 1.13 एकड़ जमीन से जुड़ा है। सितंबर 2015 में कंपनी को यह फूड कोर्ट साइट 32.50 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य पर आवंटित की गई थी। कंपनी की ओर से बकाया राशि का भुगतान नहीं करने पर गमाडा ने उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया था। हालांकि, बाद में मामले में रुख बदल गया और भुगतान में देरी के लिए कंपनी के बजाय गमाडा के एस्टेट कार्यालय की कमियों को जिम्मेदार ठहराया गया।

मुख्य अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन एस्टेट अधिकारी हरदीप सिंह ने बिल्डर को राहत देने का प्रस्ताव तैयार कर मंजूरी के लिए गमाडा की बैठक में रखा था। यह बैठक मुख्य सचिव एवं गमाडा के चेयरमैन की अध्यक्षता में हुई थी। इसके बाद एस्टेट कार्यालय की रिपोर्ट के आधार पर आवंटन की प्रभावी तारीख सितंबर 2015 से बदलकर फरवरी 2022 कर दी गई। इसी बदलाव के कारण कंपनी को करीब 47 करोड़ रुपये की कथित राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ। ईडी ने धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत जांच के दौरान गमाडा कार्यालय में तीन दिन तक तलाशी अभियान चलाया था। अब एजेंसी ने जब्त किए गए दस्तावेजों और अन्य सामग्री को अपने पास रखने के समर्थन में दिल्ली स्थित न्यायनिर्णयन प्राधिकरण के समक्ष अधिकारियों और बिल्डर के बीच कथित मिलीभगत का विवरण दिया है। एजेंसी का आरोप है कि गमाडा के कुछ अधिकारियों ने निजी लाभ के लिए बिल्डर को फायदा पहुंचाया। इस मामले में तत्कालीन एस्टेट अधिकारी हरदीप सिंह और अतिरिक्त मुख्य प्रशासक अमरिंदर सिंह मल्ही को भी ईडी ने पूछताछ के लिए तलब किया है। हालांकि, जिन वरिष्ठ अधिकारियों पर मुख्य अभियंता ने दबाव बनाने का आरोप लगाया है, उनके नाम एजेंसी ने सार्वजनिक नहीं किए हैं।

औद्योगिक जमीन आवंटन मामले में भी पूर्व अधिकारी गिरफ्तार
पंजाब में सरकारी जमीनों के आवंटन से जुड़े मामलों में ईडी की कार्रवाई के बीच पंजाब स्माल इंडस्ट्रीज एंड एक्सपोर्ट कारपोरेशन (पीएसआईईसी) के पूर्व महाप्रबंधक जसविंदर सिंह रंधावा को भी गिरफ्तार किया गया है। मामला मोहाली में बंद हो चुकी जेसीटी इलेक्ट्रानिक्स की 31 एकड़ की कीमती जमीन एक निजी बिल्डर को बेचने से जुड़ा है। यह सौदा पिछली कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के कार्यकाल में हुआ था। उस समय सुंदर शाम अरोड़ा उद्योग मंत्री थे। ईडी के अनुसार, इस सौदे से सरकारी खजाने को 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का आरोप है। एजेंसी ने मोहाली और अमृतसर के 16 बड़े औद्योगिक प्लाटों से संबंधित रिकॉर्ड भी कब्जे में लिए हैं।

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