
लखनऊ
कर्मचारियों के वेतन से भविष्य निधि (पीएफ) की रकम काटकर उनके खातों में जमा न करने के मामले में सहारा इंडिया के छह अधिकारियों के खिलाफ अलीगंज थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
खास बात यह है कि कर्मचारियों की शिकायत और ईपीएफओ की ओर से कई बार नोटिस के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस स्तर पर सुनवाई न होने के बाद मामला अदालत पहुंचा, जिसके आदेश पर अब एफआइआर दर्ज की गई है।
ईपीएफओ के प्रवर्तन अधिकारी सुहैल खान के मुताबिक कंपनी के कर्मचारियों अनुराग मिश्रा, दिनेश श्रीवास्तव और कलानिधि मिश्रा ने शिकायत की थी कि उनके वेतन से नियमित रूप से पीएफ अंशदान काटा गया, लेकिन रकम संबंधित पीएफ खातों में जमा नहीं की गई।
बाद में कई अन्य कर्मचारियों ने भी इसी तरह की शिकायतें कीं। जांच के दौरान कर्मचारियों की ओर से उपलब्ध कराए गए फार्म-16, लेजर और वेतन खाते के बैंक स्टेटमेंट की पड़ताल की गई। इसमें वेतन से पीएफ की रकम काटे जाने की पुष्टि हुई, लेकिन संबंधित खातों में रकम जमा नहीं मिली।
ईपीएफओ ने कंपनी प्रबंधन से मांगा था स्पष्टीकरण
ईपीएफओ ने कंपनी प्रबंधन से सात फरवरी और 11 मार्च 2026 को स्पष्टीकरण भी मांगा था। आरोप है कि नोटिस के बावजूद रकम जमा नहीं की गई और संतोषजनक जवाब भी नहीं दिया गया।
ईपीएफओ अधिकारी के मुताबिक नौ दिसंबर 2025 को अलीगंज थाने में शिकायत देकर एफआइआर दर्ज करने की मांग की गई थी। शिकायत 13 दिसंबर को प्राप्त होने के बावजूद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की।
इसके बाद 18 मार्च 2026 को पुलिस कमिश्नर को रजिस्टर्ड डाक से शिकायत भेजी गई। वहां भी कार्रवाई न होने पर ईपीएफओ ने अदालत की शरण ली।
पुलिस ने सहारा इंडिया मास कम्युनिकेशन के पार्टनर ओम प्रकाश श्रीवास्तव, जिया कादरी और जाय ब्रोतो राय तथा निदेशक करुणेश अवस्थी, अनिल कुमार पांडेय और राणा जिया के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों, दस्तावेजों और पीएफ अंशदान की स्थिति की जांच की जा रही है।



