600 मीटर तक निशाना साधने में सक्षम M8 कार्बाइन, जानें क्यों चर्चा में है यह आधुनिक हथियार

नईदिल्ली 
ट्रिगर दबते ही बंदूक की नली से निकली गोली जब 3,180 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ़्तार से हवा को चीरती हुई आगे बढ़ती है, तो 600 मीटर दूर छिपा बैठा दुश्मन भी ढेर हो जाता है. चाहे दुश्मन ने कितना भी मजबूत मॉडर्न बुलेटप्रूफ आर्मर क्यों न पहन रखा हो, इस हथियार की मारक क्षमता के आगे उसका बचना नामुमकिन है. वजन में हल्की, चलाने में बेहद तेज और ‘स्मार्ट कंप्यूटर’ जैसे हाई-टेक स्कोप से लैस M8 कार्बाइन (M8 Carbine) को आज डिफेंस एक्सपर्ट सेना की राइफलों का असली ‘बाप’ कह रहे हैं। 

3 साल में 50,000 राइफलों का फैसला पलटा
दुनिया की सबसे आधुनिक और ताकतवर मानी जाने वाली अमेरिकी सेना अपनी बंदूकों को बदलने और अपग्रेड करने के मामले में हमेशा बेहद सख्त रही है. लेकिन इस बार उसने जो बड़ा फैसला लिया है, उसने वैश्विक डिफेंस सेक्टर को हैरान कर दिया है. महज तीन साल पहले जिस M7 राइफल को भविष्य का सबसे विध्वंसक हथियार घोषित कर बेड़े में शामिल किया गया था, अमेरिकी सेना अब उससे दूरी बनाने जा रही है। 

तकरीबन 50,000 M7 राइफलों की डिलीवरी लेने के बाद भी US आर्मी इसे नए हथियार से रिप्लेस कर रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह रही, युद्ध के मैदान और ट्रेनिंग कैंपों में तैनात अमेरिकी सैनिकों का प्रैक्टिकल फीडबैक. वजन ज्यादा होने और लंबाई की वजह से सैनिकों को ऑपरेशन्स के दौरान काफी दिक्कतें आ रही थीं. अब US आर्मी इसकी जगह नई, हल्की और अत्याधुनिक M8 कार्बाइन को अपने बेड़े में शामिल करने जा रही है, जिसकी पहली तैनाती इसी साल दिसंबर में उत्तर कैरोलिना स्थित फोर्ट ब्रैग से शुरू होने जा रही है। 

M8 कार्बाइन का खौफनाक पावर्स
सैनिकों की शिकायतों के बाद, हथियार निर्माता कंपनी सिग सॉयर और अमेरिकी सेना ने मिलकर M7 के डिजाइन में तेजी से सुधार किए. इसी का नतीजा है नई M8 कार्बाइन, जिसे पहले XM8 नाम दिया गया था। 

    1 पाउंड हल्की और 3.5 इंच छोटी: M8 का खाली वजन केवल 3.3 किग्रा है और सप्रेसर और हीट शील्ड के साथ ये 4 किग्रा की रहती है. ये M7 से करीब आधा किलो हल्की है. वहीं इसकी बैरल भी M7 से करीब 3.5 इंच छोटी बनाई गई है, जिससे अर्बन वॉरफेयर में मूव करना आसान हो जाता है। 
    घातक 6.8 मिमी कारतूस: साइज छोटा होने के बावजूद M8 के कारतूस में कोई समझौता नहीं किया गया है. ये वही शक्तिशाली 6.8×51mm कारतूस फायर करती है, जो M7 करती थी। 

    एर्गोनॉमिक्स और फ्री-फ्लोटिंग हैंडगार्ड: M8 में M-LOK फ्री-फ्लोटिंग हैंडगार्ड दिया गया है जो बैरल को बिना छुए ग्रिप देता है, जिससे लगातार फायरिंग के दौरान बैरल का तापमान राइफल की सटीकता पर असर नहीं डालता. साथ ही, फिक्स्ड स्टॉक की वजह से रीकॉइल कंट्रोल बहुत बेहतर हो जाता है। 

3,180 किमी/घंटा स्पीड और ‘स्मार्ट कंप्यूटर’ स्कोप
    तूफानी रफ्तार : इसकी मजल वेलोसिटी करीब 3,180 किलोमीटर प्रति घंटा है. इसका मतलब है कि ट्रिगर दबाते ही गोली 1 सेकेंड से भी कम समय में 500 मीटर से ज्यादा की दूरी तय कर लेती है।     750 राउंड प्रति मिनट की स्पीड: ये सेलेक्ट-फायर मोड पर काम करती है, जिससे सैनिक इसे सिंगल शॉट या फुली-ऑटोमैटिक मोड में 600 से 750 राउंड प्रति मिनट की दर से चला सकते हैं। 

    M157 फायर कंट्रोल सिस्टम: M8 राइफल की सबसे बड़ी ताकत इसका M157 फायर कंट्रोल सिस्टम है. ये सिर्फ एक साधारण दूरबीन या स्कोप नहीं है, बल्कि 1.21 किग्रा का एक ‘स्मार्ट कंप्यूटराइज्ड स्कोप’ है. इसमें 1x से 8x जूम, लेजर रेंजफाइंडर, बैलिस्टिक कैलकुलेटर, हवा और तापमान मापने वाले सेंसर और इन्फ्रारेड ऐमिंग लेजर लगे हैं. ये स्कोप हवा और दूरी का खुद हिसाब लगाकर सिपाही की स्क्रीन पर बिल्कुल सही निशाना दिखाता है, जिससे 600 मीटर दूर बैठे दुश्मन पर भी पहला शॉट अचूक लगता है। 

2027 के बजट से M7 का पत्ता साफ
‘डिफेंस न्यूज’ के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने वित्तीय वर्ष 2027 के अपने बजट प्रस्ताव में 14,944 नई M8 कार्बाइन खरीदने की मांग रखी है, जबकि नई M7 राइफलों के लिए एक भी रुपया नहीं मांगा गया है। 

3 साल में 50,000 M7 राइफलें खरीदने के बाद M8 पर शिफ्ट होना ये साबित करता है कि कागजों पर कोई हथियार कितना भी ताकतवर क्यों न दिखे, अगर युद्ध के मैदान में सिपाही उसे आसानी से इस्तेमाल नहीं कर पा रहा, तो वह बेकार है. M8 कार्बाइन के आने से पैदल सेना को एक ऐसा हथियार मिल गया है जो हल्का भी है, तेज भी और 600 मीटर दूर बैठे दुश्मन को पलक झपकते ही ढेर करने का दम रखता है। 

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