नागरिकता से पहले वोटर लिस्ट में नाम का आरोप, सोनिया गांधी मामले में 21 सितंबर को सुनवाई

 नई दिल्ली

कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट में नाम जुड़ने से जुड़ा पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में है. आरोप है कि उनका नाम भारतीय नागरिकता मिलने से तीन साल पहले ही मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था. इस मामले में निचली अदालत जांच की मांग खारिज कर चुकी है. अब इसी फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली की अदालत 21 सितंबर को अपना आदेश सुनाएगी। 

दरअसल, अधिवक्ता विकास त्रिपाठी ने आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी का नाम 1983 में भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही मतदाता सूची में दर्ज हो गया था. उनका दावा है कि नाम करीब तीन साल पहले शामिल किया गया. इसी आधार पर उन्होंने मामले की जांच कराने की मांग की थी। 

मजिस्ट्रेट अदालत ने 11 सितंबर 2025 को इस शिकायत को खारिज कर दिया था. अदालत ने मामले की जांच से इनकार कर दिया. इसके बाद विकास त्रिपाठी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। 

अब 21 सितंबर को क्या होगा?
दिल्ली के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत में इस याचिका पर सुनवाई चल रही है. शनिवार को अदालत ने आदेश सुनाने की तारीख बढ़ाकर 21 सितंबर कर दी. इसका मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने आरोप सही मान लिया है. फिलहाल अदालत को यह तय करना है कि मजिस्ट्रेट के उस फैसले में दखल देने की जरूरत है या नहीं, जिसमें शिकायत की जांच से इनकार किया गया था। 

सोनिया गांधी की ओर से अदालत में जवाब दाखिल किया गया है. उनके वकील ने कहा कि यह शिकायत राजनीतिक रूप से प्रेरित है. उनका दावा है कि इसे किसी दूसरे मकसद से दाखिल किया गया है. इससे पहले जनवरी 2026 में भी मामले की सुनवाई हुई थी. तब सोनिया गांधी की ओर से पेश वकील ने जवाब तैयार करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था. उनका कहना था कि मामला काफी पुराने रिकॉर्ड से जुड़ा है, इसलिए जरूरी दस्तावेज जुटाने में समय लगेगा। 

विकास त्रिपाठी की पुनरीक्षण याचिका पर अदालत पहले दिल्ली पुलिस और सोनिया गांधी से जवाब मांग चुकी है. अब सभी पक्षों की दलीलें सामने आने के बाद कोर्ट अपने आदेश की ओर बढ़ रहा है। 

विदेशी मूल को लेकर पहले भी उठते रहे हैं सवाल
सोनिया गांधी के विदेशी मूल को लेकर सवाल भारतीय राजनीति में पहले भी उठ चुके हैं. 1999 में यह मुद्दा काफी बड़ा बन गया था. उस समय सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष थीं और उनके प्रधानमंत्री बनने की चर्चा भी चल रही थी. विदेशी मूल के मुद्दे को लेकर शरद पवार, पी.ए. संगमा और तारिक अनवर ने भी सवाल उठाए थे. बाद में इन नेताओं ने कांग्रेस से अलग होकर 10 जून 1999 को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) बनाई। 

अब करीब ढाई दशक बाद सोनिया गांधी से जुड़ा एक अलग सवाल अदालत में है. इस बार मुद्दा उनके विदेशी मूल का नहीं, बल्कि मतदाता सूची में नाम दर्ज होने के समय को लेकर लगाए गए आरोप का है. 21 सितंबर को अदालत के आदेश से साफ होगा कि इस मामले में आगे जांच का रास्ता खुलता है या नहीं। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button