क्रॉस वोटिंग से सियासी हलचल: हरियाणा में कांग्रेस को झटका, मेवात में BJP की बढ़ती सक्रियता

चंडीगढ़.

हरियाणा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के दो मुस्लिम विधायकों द्वारा भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के समर्थन में क्रॉस वोट करना भाजपा के लिए शुभ संकेत है। मेवात के नूंह जिले की चारों विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है। कांग्रेस के इन चार विधायकों में से दो को भाजपा ने राज्यसभा चुनाव में अपने समर्थन में वोटिंग के लिए तैयार कर जहां मेवात क्षेत्र में अपनी राजनीतिक पकड़ बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, वहीं कांग्रेस के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं।

राज्यसभा चुनाव में हथीन के कांग्रेस विधायक मोहम्मद इसराइल और पुन्हाना के कांग्रेस विधायक मोहम्मद इलियास के वोट क्रॉस हुए हैं। इन दोनों विधायकों को कांग्रेस ने कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। विधायकों के जवाब से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में क्रॉस वोट करने के आरोपी इन विधायकों को किसी भी समय कांग्रेस पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। कांग्रेस का यह फैसला भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से काफी मददगार साबित हो सकता है। भाजपा क्रॉस वोट करने के आरोपी विधायकों को अपने गले लगाने के लिए तैयार बैठी है। हरियाणा में साल 2024 के विधानसभा चुनाव में पांच मुस्लिम विधायक चुनाव जीतकर आए हैं और पांचों कांग्रेस से हैं। नूंह से चौधरी आफताब अहमद तीसरी बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते हैं। फिरोजपुर झिरका से मामन खान दूसरी बार चुनाव जीते, जबकि हथीन से कांग्रेस विधायक मोहम्मद इसराइल पहली बार चुनाव जीते हैं।

पुन्हाना के कांग्रेस विधायक मोहम्मद इलियास की तबीयत आजकल ठीक नहीं रहती। उनका नियमित डायलिसिस होता है। मोहम्मद इलियास पुन्हाना से तीसरी बार चुनाव जीते हैं। कांग्रेस से पहले वे इनेलो की राजनीति करते रहे हैं। यमुनानगर जिले की जगाधरी विधानसभा सीट भी मुस्लिम बाहुल्य है, जहां से चौधरी अकरम खान दूसरी बार चुनाव जीते हैं। उन्होंने पहला चुनाव बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर जीता था।
हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों में से एक पर भाजपा और दूसरी पर कांग्रेस की जीत हुई है। कांग्रेस को जीत हासिल करने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के समर्थन में कांग्रेस के चार वोट निरस्त हुए और चार क्रास हुई हैं।

जिन चार विधायकों की वोट क्रास हुई है, उनमें मेवात क्षेत्र के दो मुस्लिम विधायक मोहम्मद इसराइल और मोहम्मद इलियास भी शामिल हैं।
इसी तरह ओडिसा के राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस विधायक सोफिया फिरदौस ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार को अपना वोट दिया है। ओडिशा व हरियाणा में जिस तरह से कांग्रेस के मुस्लिम विधायकों का भाजपा के प्रति राजनीतिक प्रेम बढ़ा है, वह पार्टी के लिए नई संभावनाएं पैदा कर रहा है। मेवात भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से ज्यादा उपजाऊ नहीं रहा है। शुरू से यहां कांग्रेस और इनेलो का दबदबा रहा है। भाजपा ने इनेलो से शामिल हुए दो तत्कालीन विधायकों जाकिर हुसैन को नूंह और नसीम अहमद को फिरोजपुर झिरका से टिकट दिया था, मगर साल 2019 के चुनाव में दोनों ही हार गए थे।

पिछले चुनाव में अच्छा नहीं रहा भाजपा का प्रदर्शन
साल 2024 के चुनाव में भी भाजपा का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा। ऐसे में राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने जिस तरह से मेवात क्षेत्र के दो विधायकों को तोड़कर अपने पाले में लाने में सफलता हासिल की, उससे संभावना बन रही है कि यदि कांग्रेस इन विधायकों को अपनी पार्टी से बाहर निकालने का फैसला लेती है तो भाजपा भविष्य में उन्हें अपनी पार्टी से चुनाव लड़वाने से परहेज नहीं करेगी।

कांग्रेस के बागी मुस्लिम विधायकों के लिए भाजपा अछूत नहीं
भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के लिए जागा मुस्लिम कांग्रेस विधायकों का प्रेम यह संकेत भी दे रहा है कि अब भाजपा उनके लिए बिल्कुल भी अछूत नहीं है। भाजपा उनका सहयोग लेना चाहती है और मुस्लिम देना चाहते हैं। ऐसे में न केवल इनेलो बल्कि कांग्रेस के लिए अपार चुनौतियां हैं। भाजपा सूत्रों का कहना है कि जगाधरी के कांग्रेस विधायक मोहम्मद अकरम खान से भी राज्यसभा चुनाव में वोट के लिए संपर्क साधा गया था, लेकिन ऐन वक्त पर बात बनते-बनते बिगड़ गई।

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