ओपन जेलों की स्थिति पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को रिपोर्ट देने का निर्देश

 रांची

झारखंड हाईकोर्ट ने सूबे की ओपन जेलों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए बड़ा कदम उठाया है. सोमवार को कोर्ट ने जनहित याचिका में तब्दील स्वत: संज्ञान पर सुनवाई की. इस मामले को न्यायपालिका ने जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा मानते हुए व्यापक निगरानी का निर्देश दिया है. इसके लिए अदालत ने झारखंड सरकार को निर्देश दिया है कि गृह सचिव की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति का गठन किया जाए.

पीठ ने दिए सख्त निर्देश
चीफ जस्टिस एमएस सौनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए. कोर्ट ने कहा कि ओपन जेलों की स्थिति सुधारने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जाए. इस समिति की अध्यक्षता गृह सचिव करेंगे और इसमें कारा महानिदेशक तथा संबंधित जेल अधीक्षक को भी शामिल किया जा सकता है.

स्टेटस रिपोर्ट पेश करने का आदेश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक गठित समिति की प्रगति रिपोर्ट पेश की जाए. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले की अगली सुनवाई 11 जून 2026 को होगी. कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ओपन जेलों में सुधार के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं.

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन जरूरी
इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी शामिल हैं. सर्वोच्च अदालत ने देशभर की ओपन जेलों की मॉनिटरिंग के लिए गृह विभाग को कमेटी बनाने और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने का निर्देश दिया है. इसमें चिकित्सा सुविधा, जिम, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को सुधारने पर विशेष जोर दिया गया है.

कैदियों के पुनर्वास पर फोकस
ओपन जेलों का उद्देश्य कैदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया को मजबूत करना है. ऐसे में वहां की सुविधाओं का बेहतर होना बेहद जरूरी है. हाईकोर्ट ने इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए इस मामले को गंभीरता से लिया है.

पहले स्वत: संज्ञान, अब जनहित याचिका
गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल को इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था. अब इसे जनहित याचिका में तब्दील कर दिया गया है, जिससे इस मुद्दे पर नियमित सुनवाई और निगरानी सुनिश्चित हो सके.

सुधार की दिशा में अहम कदम
हाईकोर्ट का यह कदम राज्य की जेल व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यदि कोर्ट के निर्देशों का सही तरीके से पालन होता है, तो ओपन जेलों में रहने वाले कैदियों को बेहतर जीवन स्तर और पुनर्वास के अवसर मिल सकेंगे.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button