घर खरीदारों की बड़ी जीत: रेरा का सख्त रुख, बिल्डर को ब्याज सहित मुआवजा देने का निर्देश

चंडीगढ़.
रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण ने फ्लैट सौंपने में छह साल का विलंब करने पर ओमैक्स प्रमोटर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने ग्राहकों के हक में फैसला सुनाते हुए डेवलपर को लाखों रुपये का ब्याज भुगतान करने और वैध कब्जा मिलने तक हर महीने निश्चित मुआवजा राशि देने का निर्देश जारी किया है।

रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण का ऐतिहासिक फैसला
पंजाब रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण ने संपत्ति निर्माण क्षेत्र की एक अग्रणी कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। न्यू चंडीगढ़ क्षेत्र में आवास परियोजना के क्रियान्वयन में हुई अत्यधिक देरी को गंभीरता से लेते हुए नियामक संस्था ने उपभोक्ता संरक्षण के तहत बड़ा कदम उठाया है। कबीर चौहान और बृंद्रा चौहान की याचिका पर सुनवाई पूरी करते हुए प्राधिकरण ने पाया कि कंपनी ने तय समय सीमा के भीतर फ्लैट का भौतिक अधिकार देने में घोर लापरवाही बरती है, जिससे आवंटियों को मानसिक और वित्तीय परेशानी का सामना करना पड़ा।

छह साल के विलंब पर लगा भारी वित्तीय जुर्माना
विवाद की गहराई से जांच करने के बाद नियामक संस्था ने ओमैक्स न्यू चंडीगढ़ एक्सटेंशन डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को दोषी करार दिया। आदेश के तहत डेवलपर को छह साल की लंबी अवधि के विलंब के बदले ग्राहकों को चौवन दशमलव दो सात लाख रुपये से अधिक की राशि केवल ब्याज के रूप में चुकानी होगी। कंपनी ने अदालती कार्यवाही के दौरान वैश्विक स्वास्थ्य संकट और श्रमिकों की कमी का हवाला देकर राहत पाने की कोशिश की थी, लेकिन प्राधिकरण ने इन तर्कों को अप्रासंगिक मानते हुए खारिज कर दिया क्योंकि परियोजना की समय सीमा संकट काल से बहुत पहले ही समाप्त हो चुकी थी।

हर महीने अतिरिक्त मुआवजा देने का सख्त निर्देश
नियामक संस्था ने खरीदारों के हितों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल एकमुश्त ब्याज पर ही रोक नहीं लगाई बल्कि एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया। फैसले के मुताबिक जब तक ग्राहकों को वैध ऑक्यूपेंसी और कंप्लीशन सर्टिफिकेट के साथ फ्लैट का असली और कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक डेवलपर को हर महीने तिरेसठ हजार एक सौ पांच रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देना होगा। इसके अलावा कारपेट एरिया की जगह सुपर एरिया के आधार पर अत्यधिक शुल्क वसूलने के आरोपों पर भी कड़ा रुख अपनाया गया है, जिससे रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी।

 

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