दिल्ली में भगवंत मान का बड़ा बयान: ‘पंजाब में ऑपरेशन लोटस नहीं’, द्रौपदी मुर्मू से की मुलाकात

चंडीगढ़. 

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद भाजपा और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पंजाब कोई ट्रक नहीं है, जिसकी बारी आएगी और कोई भी आकर उसे चला लेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक मूल्यों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री मान ने राष्ट्रपति से मुलाकात के दौरान राज्यसभा सांसदों के पार्टी बदलने के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने इसे “संविधान की हत्या” बताते हुए कहा कि अचानक कुछ सांसद इकट्ठे होकर खुद ही यह ऐलान कर देते हैं कि वे अब इस पार्टी में नहीं हैं और दूसरी पार्टी में मर्ज हो गए यह पूरी तरह

असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक है।” उन्होंने कहा कि
लोकतंत्र में पार्टी विलय और दल-बदल के स्पष्ट नियम हैं, लेकिन यहां उन नियमों को दरकिनार कर राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे लगातार यह कह रहे हैं कि अब पंजाब का नंबर है। आखिर किस चीज का नंबर? पंजाब का कोई नंबर नहीं है। यह उनकी गलतफहमी और राजनीतिक बयानबाजी है। उन्होंने कहा कि पंजाब ने हर संकट में देश का साथ दिया है और आगे भी देता रहेगा, लेकिन राज्य के अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा।

केंद्र सरकार पर एजेंसियों और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप
मुख्यमंत्री मान ने केंद्र सरकार पर एजेंसियों और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए जांच एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा के पास पंजाब में महज दो विधायक हैं, लेकिन राज्यसभा में संख्या बढ़ना जनादेश के विपरीत है। मुख्यमंत्री ने केंद्र द्वारा पंजाब के अधिकारों में कथित दखल का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कभी बीबीएमबी (बीबीएमबी) को लेकर विवाद खड़ा किया जाता है, कभी भाखड़ा डैम पर दावा किया जाता है। पानी के बंटवारे में भी पंजाब के हक को नजरअंदाज करने की कोशिश होती है।” इसके अलावा उन्होंने चंडीगढ़ और पंजाब यूनिवर्सिटी को लेकर दिए जा रहे बयानों पर भी आपत्ति जताई।

आर्थिक मोर्चे पर भी मुख्यमंत्री ने केंद्र को घेरा
आर्थिक मोर्चे पर भी मुख्यमंत्री ने केंद्र को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि एनएचएम एनएचएम) और आरडीएफ (आरडीएफ) जैसे महत्वपूर्ण फंड रोके जा रहे हैं, जिससे राज्य के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां तक कि गणतंत्र दिवस की झांकी पर भी सवाल उठाना पंजाब की अनदेखी को दर्शाता है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच आप छोड़कर भाजपा में शामिल हुए राज्यसभा सदस्यों ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा और पंजाब सरकार पर एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप लगाए।

द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात के बाद बोले राघव चड्ढा 
वहीं, राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने कहा कि आप अब डेंजरस गेम खेल रही है और इसका अंजाम खतरनाक होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी बदले की राजनीति कर रही है और विरोधियों को निशाना बना रही है। कुल मिलाकर, पंजाब की सियासत इस समय टकराव के चरम पर है। एक ओर मुख्यमंत्री मान लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी खेमे से लगातार पलटवार हो रहा है।

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