
जमशेदपुर
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पोते वीर सोरेन का गुरुवार को पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनका अंतिम संस्कार जमशेदपुर के पास सरायकेला-खरसावां जिले के जिलंगगोड़ा गांव में हुआ। अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कई विधायक-सांसद, समर्थक और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए।
वीर सोरेन अपने दोस्तों के साथ घूमने के लिए मनाली गए थे। जानकारी के अनुसार वे 22 फरवरी को मनाली पहुंचे थे और सिमसा के एक होम स्टे में ठहरे थे। 23 फरवरी को उन्होंने सोलंग और सेथन इलाके में घूमने गए थे। 24 फरवरी की दोपहर करीब 12:30 बजे वे घूमकर कमरे में लौटे और सिर में तेज दर्द की शिकायत की। दोस्तों ने ऑनलाइन दवा मंगाकर उन्हें दी, जिसके बाद वे आराम करने लगे। करीब 2:30 बजे कमरे से गिरने की आवाज आई। दोस्त अंदर पहुंचे तो देखा कि वीर सोरेन फर्श पर अचेत पड़े हैं। उन्हें तुरंत गाड़ी से मनाली सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अस्पताल ले जाते समय उनके मुंह से झाग निकल रहा था।
गांव पहुंचते ही माहौल हुआ गमगीन
गुरुवार दोपहर जब वीर सोरेन का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव जिलंगगोड़ा पहुंचा तो पूरा गांव शोक में डूब गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण और समर्थक अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। सभी ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अंतिम संस्कार से पहले चंपाई सोरेन के आवास पहुंचे और वीर सोरेन को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने शोक संतप्त परिवार से मिलकर उन्हें ढांढ़स बंधाया। सिंहभूम की सांसद जोबा माझी भी गांव पहुंचीं और वीर सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने चंपाई सोरेन से मुलाकात कर इस दुख की घड़ी में परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि यह क्षति न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए दुखद है।



