मोतिहारी-बेतिया में मिलावटी खून बेचने वाले गिरोह की तलाश, दो लैब पर छापेमारी से मचा हड़कंप

मोतिहारी
 बिहार में खून के काले कारोबार का खुलासा हुआ है। पूर्वी चंपारण में एक यूनिट रक्त में आयरन सिरप और नॉर्मल स्लाइन मिलाकर तीन यूनिट बनाने और फर्जी लेबल लगाकर निजी नर्सिंग होम में बेचने के मामले सामने आए हैं। यह जानकारी मिलने के बाद औषधि विभाग ने बेतिया में पुलिस के सहयोग से दो लैब ठिकानों पर छापेमारी की है, लेकिन दोनों संचालक फरार मिले। बताया जाता है कि ये संचालक मोतिहारी में भी रक्त की आपूर्ति करते हैं। अब मोतिहारी में भी बड़े पैमाने पर छापेमारी की तैयारी है। सूत्रों के अनुसार, इस धंधे में संगठित गिरोह सक्रिय है। कहा जा रहा है कि गिरोह के पास जरूरतमंद युवकों और नशे के आदी लोगों की सूची है, जो तीन से चार सौ रुपये में रक्त देने को तैयार हो जाते हैं। कई बार नशे की लत के कारण एक ही व्यक्ति महीने में दो-तीन बार रक्त बेच देता है।

इन लोगों से बिना जांच रक्त लेकर दो से तीन हजार रुपये प्रति यूनिट की दर से कुछ निजी नर्सिंग होम को बेचा जाता है। उन्होंने बताया कि इस मामले में मोतिहारी और बेतिया के धंधेबाजों के नाम सामने आ रहे हैं। बेतिया में पुलिस के सहयोग से दो लैब पर छापेमारी की गई, लेकिन दोनों संचालक फरार हो गए। उनकी तलाश जारी है। उन्होंने बताया कि एजेंट की गिरफ्तारी के बाद यह पता चल सकेगा कि रक्त कहां से जुटाया जाता था और किन-किन नर्सिंग होम में इसकी आपूर्ति होती थी। बताया जाता है कि पटना स्थित स्वास्थ्य विभाग को निजी नर्सिंग होम में मिलावटी रक्त बेचने की जानकारी मिली थी। इसके बाद विभाग ने औषधि विभाग को सतर्क करते हुए छापेमारी अभियान चलाने और संदिग्ध नर्सिंग होम व ब्लड बैंकों पर निगरानी रखने का निर्देश दिया। सदर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. कुमार अमृतांशु ने कहा कि ब्लड की थैली में मिलावट अपने आप में खतरनाक है।

खतरनाक है मिलावटी खून
रक्त में आयरन सिरप मिला देने से मरीज को रिएक्शन हो सकता है। इससे मरीज को लाभ मिलने के बजाय उसकी जान को भी खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि मरीज की जान बचाने के लिए उचित गुणवत्ता वाला और जांच किया हुआ रक्त जरूरी है। मरीज को उसकी जरूरत के अनुसार हीमोग्लोबिन के स्तर और चिकित्सकीय स्थिति के अनुरूप रक्त चढ़ाया जाना चाहिए। इसके बावजूद यदि रक्त में मिलावट कर मरीज को चढ़ाया जाता है, तो यह उसकी जान के साथ खिलवाड़ है।

डॉ. अमृतांशु ने कहा कि पहले सुनने में आता था कि नशे के आदी लोग नशे के लिए पैसे जुटाने के उद्देश्य से रक्त बेचते हैं। ऐसे लोगों के रक्त में पहले से ही हीमोग्लोबिन कम हो सकता है। लेकिन अब एक यूनिट रक्त में आयरन सिरप और नॉर्मल स्लाइन मिलाकर तीन यूनिट बनाने की बात सामने आ रही है। ऐसी स्थिति में मरीज की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता है।

निबंधित ब्लड बैंक से ही रक्त लें मरीज
आईएमए अध्यक्ष डॉ. टीपी सिंह ने बताया कि मिलावटी या बिना जांच का रक्त चढ़ाने से रिएक्शन हो सकता है, जिससे मरीज की जान भी जा सकती है। इससे एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, मलेरिया, जॉन्डिस और अन्य गंभीर बीमारियों के संक्रमण का खतरा रहता है। उन्होंने कहा कि मरीज को हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए रक्त चढ़ाया जाता है, लेकिन बनावटी रक्त से अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा और मरीज की परेशानी बनी रह सकती है। इसलिए लोगों को निबंधित ब्लड बैंक से ही रक्त लेना चाहिए और बिचौलियों के माध्यम से रक्त लेने से बचना चाहिए।

बिना जांच रक्त चढ़ाने से संक्रमण का खतरा
नियमों के अनुसार, रक्त की प्रत्येक यूनिट की एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, हेपेटाइटिस-सी, उपदंश और मलेरिया की जांच अनिवार्य है। आरोप है कि अवैध तरीके से जुटाए जा रहे रक्त की जांच नहीं होती। इससे मरीजों को गंभीर संक्रमण का खतरा हो सकता है।

सदर अस्पताल में पिछले दिनों एक मरीज के परामर्श के दौरान पता चला कि उसे एक निजी नर्सिंग होम में बिना जांच का रक्त चढ़ाया गया था। बाद में वह एचआईवी संक्रमित मिला। कुछ अन्य मरीजों में भी पीलिया और दूसरे संक्रमण की शिकायत मिलने की बात कही गई है। चिकित्सकों के अनुसार, बिना जांच रक्त चढ़ाने से संक्रमण और अन्य गंभीर जटिलताओं का खतरा रहता है। मिलावटी रक्त से मरीज को अपेक्षित लाभ भी नहीं मिल सकता।

लगाते हैं ब्लड बैंक का फर्जी लेबल
सूत्र बताते हैं कि गिरोह एक यूनिट रक्त में आयरन सिरप और नॉर्मल स्लाइन का पानी मिलाकर उसकी मात्रा तीन गुना कर देता है। इसके बाद रक्त पर ब्लड बैंक का फर्जी लेबल लगाकर बेच दिया जाता है, ताकि किसी को संदेह न हो। औषधि निरीक्षक राकेश कुमार ने बताया कि एक मामला संज्ञान में आया है, जिसमें एक यूनिट रक्त में आयरन सिरप और नॉर्मल स्लाइन का पानी मिलाकर तीन यूनिट बनाने और कुछ नर्सिंग होम में आपूर्ति करने की बात सामने आई है।

उन्होंने बताया कि इस मामले में मोतिहारी और बेतिया के धंधेबाजों के नाम सामने आ रहे हैं। बेतिया में पुलिस के सहयोग से दो लैब पर छापेमारी की गई, लेकिन दोनों संचालक फरार हो गए। उनकी तलाश जारी है। उन्होंने बताया कि एजेंट की गिरफ्तारी के बाद यह पता चल सकेगा कि रक्त कहां से जुटाया जाता था और किन-किन नर्सिंग होम में इसकी आपूर्ति होती थी।

प्राथमिकी दर्ज कर लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी
सिविल सर्जन डॉ. दिलीप कुमार ने बताया कि मामला अत्यंत गंभीर है। इस धंधे में संलिप्त पाए जाने वाले नर्सिंग होम और लैब के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी तथा उनके लाइसेंस रद्द किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग इस मामले पर नजर रख रहा है। सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को अलर्ट कर छापेमारी अभियान शुरू करने का निर्देश दिया गया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button