
लखनऊ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को लोक भवन सभागार में उत्तर प्रदेश पुलिस में कुशल खिलाड़ी कोटे के अंतर्गत चयनित 470 खेल प्रतिभाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों, खेलों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश में युवाओं की नौकरी पर एक परिवार का कब्जा था और नौकरी पाने के लिए ‘सैफई या सिफारिश’ की जरूरत पड़ती थी, जबकि आज नियुक्ति में न किसी की सिफारिश चलती है और न पैसा। आज सिर्फ खिलाड़ी की प्रतिभा, परिश्रम और पसीने की कीमत मिल रही है। “पहले प्रदेश डुबाओ एलायंस’’ था और अब एनडीए की सरकार है। एनडीए का मतलब है- “नौकरी देंगे एलायंस।” अब नौकरी पर केवल पसीने और प्रतिभा का कब्जा है। जिन खिलाड़ियों ने अपने परिश्रम से अपनी प्रतिभा साबित की, उन्हें उसी आधार पर नियुक्ति मिल रही है।
‘सैफई या सिफारिश’ का दौर खत्म
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले प्रदेश में युवाओं के सामने पहचान का संकट था और उनकी नौकरियों पर डकैती डाली जाती थी। खिलाड़ी मैदान में पसीना बहाता था। उसके पास सिफारिश कराने का समय नहीं था। इसी कारण उसे नौकरी नहीं मिल पाती थी। वर्ष 2017 से पहले समाजवादी पार्टी की सरकार के समय बड़ी संख्या में अराजक तत्वों को संरक्षण मिला। सपा ने प्रदेश में 10 लाख गुंडे पाले थे। वे बेटियों की सुरक्षा के लिए खतरा बनते थे। दंगे-अराजकता फैलाते, गरीबों की जमीनों पर कब्जा करते थे। इसके विपरीत हमारी सरकार ने 10 लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी देकर उत्तर प्रदेश को नई पहचान देने का काम किया है।
सपा की बातें मगरमच्छ के शांति उपदेश जैसी
सीएम ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी युवाओं की नियुक्ति की बात करती है तो हंसी आती है। लगता है जैसे कोई पानी में तैरता मगरमच्छ शांति का उपदेश दे रहा हो। ऐसे मगरमच्छों से सावधान रहना होगा। आप खूब खेलिए, खूब पसीना बहाइए, नए रिकॉर्ड बनाइए। नौकरी की चिंता मत करिए, हमने ऐसी पॉलिसी बना दी है कि नौकरी आपको जरूर मिलेगी। कोई भी आपका प्रमोशन नहीं टाल सकता और ऐसा करेगा तो हम उसको ही टाल देंगे।
शराब और सपा से सावधान रहें युवा
मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं को शराब व सपा से सावधान रहना चाहिए। ये दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं, दोनों ने प्रदेश को बर्बाद किया था। सरकार की खेल नीति का उद्देश्य अच्छे खिलाड़ियों को आगे बढ़ाना और उन्हें सम्मान व अवसर देना है। 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में खनन, भर्ती, रिवर फ्रंट समेत विभिन्न घोटालों की चर्चा होती थी, जबकि आज प्रदेश में मेरठ में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट, वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज और खिलाड़ियों के मेडल्स की चर्चा होती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने केवल चुनाव जीतने के रिकॉर्ड नहीं बनाए, बल्कि मेडल जीतने के रिकॉर्ड भी बनाए हैं। एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों द्वारा 107 मेडल जीतने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे अब तक का सर्वोच्च रिकॉर्ड बताया और खिलाड़ियों से नए रिकॉर्ड बनाने का आह्वान किया।
‘मर्डर से मेडल तक बदली यूपी की पहचान’
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री जी खिलाड़ियों के साथ व्यक्तिगत संवाद करते हैं, उनकी सुविधाओं पर ध्यान देते हैं और दुनिया में अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को फोन करके प्रोत्साहित करते हैं। कभी भारत की पहचान राष्ट्रमंडल खेलों के घोटालों से होती थी, लेकिन आज भारत के खिलाड़ी देश के लिए मेडल्स लेकर लौट रहे हैं। इसी तरह पहले प्रदेश की पहचान अपराध और अराजकता से जुड़ी खबरों से होती थी, लेकिन आज यूपी की पहचान उसके कुशल खिलाड़ियों के मेडल्स से हो रही है। मर्डर और मेडल में अंतर है- एक पहचान दिलाता है और दूसरा पहचान डुबोता है।
जर्सी से वर्दी की यात्रा में भी वही अनुशासन चाहिए
मुख्यमंत्री ने नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों से कहा कि आज उनकी ‘जर्सी से वर्दी’ की यात्रा शुरू हुई है। जर्सी में उन्होंने जिस अनुशासन, टीम वर्क, परिश्रम और समर्पण के साथ परिणाम दिए हैं, वर्दी में भी उनसे वही अपेक्षा है। नवनियुक्त 470 खिलाड़ियों में 303 पुरुष और 167 महिलाएं शामिल हैं। आरक्षी नागरिक पुलिस में 295 खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जिनमें 148 पुरुष और 147 महिलाएं हैं। उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस में 43 पुरुष और 20 महिलाएं हैं, जबकि आरक्षी पीएसी में 132 खिलाड़ियों का चयन हुआ है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से पूछा कि क्या नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान किसी ने उनसे पैसे की मांग की? क्या किसी को सिफारिश कराने की जरूरत पड़ी? आज जो नियुक्ति पत्र उन्हें मिल रहा है, वह न सरकार की कृपा है और न मुख्यमंत्री की अनुकंपा, बल्कि यह उनके पसीने और परिश्रम की कीमत है।
2017 से बदली खिलाड़ी नियुक्ति की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पुलिस अथवा किसी अन्य विभाग में खिलाड़ियों की सीधी भर्ती का कोई नियम नहीं था। उनकी सरकार ने पुलिस भर्ती की प्रक्रिया के साथ-साथ विभिन्न विभागों में खिलाड़ियों को सीधी नियुक्ति देने की व्यवस्था शुरू की। अब तक करीब 1000 खिलाड़ियों को सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं। इसके साथ 1470 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी है और 555 खिलाड़ियों की चयन प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। जीवन में जीत का जितना महत्व है, उससे कहीं अधिक महत्व हार के बाद खड़ा होना, फिर तैयारी करना, संघर्ष करना और अंततः मेडल जीतकर लौटना है।
डिप्टी एसपी बनने के लक्ष्य ने दिलाया गोल्ड
सीएम ने कहा कि उन्होंने एक खिलाड़ी से पूछा कि मेडल जीतने के पीछे उसकी प्रेरणा क्या थी। खिलाड़ी ने कहा कि उसने गोल्ड मेडल इसलिए जीता, क्योंकि उसका लक्ष्य उत्तर प्रदेश पुलिस में डिप्टी एसपी बनना था। जिस तरह अर्जुन का निशाना अपने लक्ष्य पर था, उसी तरह उस खिलाड़ी का लक्ष्य भी डिप्टी एसपी का पद था और उसने अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश के लिए मेडल जीता। सरकार अब तक ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और एशियाई खेलों में मेडल जीतने वाले सात कुशल खिलाड़ियों को सीधी भर्ती से डिप्टी एसपी का पद दे चुकी है। हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय को ओलंपिक में भारत की हॉकी टीम के मेडल जीतने के बाद सरकार ने डिप्टी एसपी का पद दिया। गाजीपुर के राजकुमार पाल का परिवार बेहद गरीब था, लेकिन उनकी प्रतिभा और परिश्रम ने उन्हें ओलंपिक में मेडल तक पहुंचाया। सरकार ने उन्हें भी डिप्टी एसपी का पद दिया।
खिलाड़ियों को 200 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओलंपिक और अन्य प्रतियोगिताओं में प्रदेश के लिए मेडल जीतने वाले कुशल खिलाड़ियों को सरकार ने अब तक 200 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई है। एक समय उत्तर प्रदेश की स्थिति ऐसी थी कि सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच ही जीवन सीमित था। न उससे पहले लोग सुरक्षित महसूस करते थे और न बाद में। खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थिति भी अच्छी नहीं थी। 2017 में सरकार बनने के बाद भू-माफिया के खिलाफ अभियान चलाया गया। सरकारी, गरीबों, व्यापारियों और सार्वजनिक स्थलों की जमीनों पर किए गए अवैध कब्जों को हटाया गया। करीब 64 हजार हेक्टेयर जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराया गया। आज उसी भूमि का उपयोग गांव से लेकर ब्लॉक, जनपद और प्रदेश स्तर तक खेल सुविधाओं के विकास में किया जा रहा है। प्रदेश में खेल मैदान, मिनी स्टेडियम, स्टेडियम और इंटरनेशनल स्टेडियम विकसित हो रहे हैं। हर कमिश्नरी में स्पोर्ट्स कॉलेज विकसित किए जा रहे हैं। इनमें अलग-अलग खेलों के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जा रहे हैं, जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रैक्टिस सुविधा, प्रशिक्षित कोच और आवश्यक टीम उपलब्ध हो।
खेलो इंडिया से विधायक और ग्रामीण खेल प्रतियोगिताओं तक
सीएम योगी ने कहा कि नशे के खिलाफ सबसे बड़ा ब्रांड एंबेसडर कोई बन सकता है तो वह खिलाड़ी है। खिलाड़ी से अधिक कोई नहीं समझ सकता कि नशे की कीमत व्यक्ति, परिवार और समाज को क्या चुकानी पड़ती है। हर खिलाड़ी को नशे के खिलाफ अभियान का हिस्सा बनना चाहिए। 1400 से अधिक कुशल खिलाड़ी यूपी पुलिस का हिस्सा बन चुके हैं। इन खिलाड़ियों को कोई न कोई गांव गोद दिया जाए और उन्हें सप्ताह में कम से कम एक दिन वहां खेलकूद की गतिविधियों के संचालन के लिए भेजा जाए। जिस प्रकार महिला बीट पुलिस अधिकारी सप्ताह में एक दिन किसी गांव में जाती हैं, उसी प्रकार पुलिस के खिलाड़ी भी गांवों में जाकर युवाओं को खेलों से जोड़ें।
‘रील में लाइक्स मिलते हैं, खेल के मैदान में लाइफ’
मुख्यमंत्री ने युवाओं में बढ़ते रील कल्चर पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज के युवा घंटों रील में अपना समय बर्बाद कर रहे हैं। रील में लाइक्स मिलते हैं, लेकिन खेल के मैदान में आपको लाइफ मिलती है, एक नई लाइफ। अब उन्हें तय करना है कि केवल लाइक्स चाहिए या जीवन की वास्तविक उपलब्धि। आज की नियुक्ति नए जीवन की शुरुआत है। अच्छा प्रदर्शन, नियमित अभ्यास और खुद को मजबूत बनाने के साथ खिलाड़ियों के सामने प्रमोशन और आगे बढ़ने के नए अवसर भी खुलेंगे।
खेल समाप्त नहीं हुआ: केशव प्रसाद मौर्य
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि नियुक्ति मिलने से खिलाड़ियों का खेल समाप्त नहीं हुआ है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश की कानून व्यवस्था ध्वस्त थी। आज बेहतर कानून व्यवस्था की देशभर में चर्चा है। पहले खिलाड़ियों को अपेक्षित अवसर नहीं मिलते थे। अब पदक जीतकर आने वाले खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरियों के अवसर हैं।
पुरस्कार राशि ढाई गुना से अधिक बढ़ी: गिरीश यादव
खेल राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की पुरस्कार राशि ढाई गुना से अधिक बढ़ाई है। खेल नीति-2023 लागू करने के साथ आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों के लिए एकलव्य क्रीड़ा कोष बनाया गया। प्रत्येक मंडल में स्पोर्ट्स कॉलेज खोलने का निर्णय हुआ है। मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय का निर्माण पूरा हो चुका है और इसका लोकार्पण होना है।
खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न पदोन्नतियां: डीजीपी
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने बताया कि वर्ष 2022 से अब तक 950 कुशल खिलाड़ियों की भर्ती हो चुकी है। निरीक्षक और दलनायक पद पर 14, उपनिरीक्षक और प्लाटून कमांडर पद पर 59 तथा मुख्य आरक्षी पद पर 440 आउट ऑफ टर्न पदोन्नतियां दी गई हैं। उन्होंने कहा कि खेल से मिला अनुशासन और दबाव में निर्णय लेने की क्षमता पुलिस सेवा में उपयोगी होगी।
लघु फिल्म में दिखा गुड़िया का संघर्ष
कार्यक्रम में खिलाड़ियों के संघर्ष पर आधारित लघु फिल्म दिखाई गई। इसमें भदोही के छेछुआ गांव की गुड़िया की कहानी भी थी, जिन्होंने 400 मीटर बाधा दौड़ में राष्ट्रीय पदक जीता है। नियुक्ति पाने वाले खिलाड़ियों ने खाकी पहनकर जनसेवा का संकल्प जताया।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, खेल और युवा कल्याण विभाग के मंत्री गिरीश चंद्र यादव, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नत बोर्ड एस.बी. शिरोडकर, पुलिस महानिदेशक पीएसी आलोक सिंह के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ अधिकारीगण, नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले कुशल खिलाड़ीगण और उनके अभिभावक उपस्थित रहे।



