स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, संवेदनशील वर्गों तक पहुंच और आगामी प्राथमिकताओं पर हुई विस्तार से चर्चा

जयपुर
 राज्य सरकार प्रदेश में मातृ, नवजात, शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण एवं समान रूप से सुलभ बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी दिशा में मंगलवार को यूनिसेफ़  इंडिया के उप प्रतिनिधि जेस्पर मोलर ने मंगलवार को शासन सचिवालय में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ से मुलाकात कर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति एवं आगामी प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक में मातृ, नवजात, शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ विशेष रूप से संवेदनशील एवं वंचित वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में राजस्थान सरकार एवं यूनिसेफ़ के बीच जारी साझेदारी को और मजबूत करते हुए नई स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान, नवाचार तथा बेहतर स्वास्थ्य परिणामों की दिशा में मिलकर कार्य करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

जेस्पर मोलर ने स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद इक्विटी गैप्स पर चर्चा करते हुए कहा कि सरकार के पास व्यापक स्तर पर सेवाओं को पहुंचाने की क्षमता है, जबकि यूनिसेफ़ नवाचार, साक्ष्य आधारित समाधान एवं प्रभावी मॉडल उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकता है। बैठक में इन समाधानों को बड़े स्तर पर लागू करने तथा स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में लाइफ-साइकिल अप्रोच को और मजबूत करने तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर कन्वर्जेंस और समन्वय की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इसका उद्देश्य बच्चों एवं किशोरों से लेकर माताओं एवं नवजातों तक स्वास्थ्य सेवाओं को एक समग्र दृष्टिकोण के साथ मजबूत करना है।

यूनिसेफ़ के उप प्रतिनिधि ने प्री-सर्विस मेडिकल एजुकेशन में बाल अधिकारों के दृष्टिकोण को शामिल करने का प्रस्ताव रखा। प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया और यूनिसेफ़ से इस संबंध में विस्तृत कॉन्सेप्ट नोट उपलब्ध कराने का अनुरोध किया, ताकि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जा सके।

मोलर ने प्रमुख शासन सचिव को राजस्थान दौरे के दौरान किशनगढ़ स्थित स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट के अपने दौरे के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने यहां चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा कमजोर एवं गंभीर नवजातों की जीवन रक्षा के लिए किए जा रहे समर्पित प्रयासों को देखा और फ्रंटलाइन स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता एवं सेवाभाव की सराहना की।

बैठक में यूनिसेफ़ के आगामी कंट्री प्रोग्राम 2028–2032 को लेकर प्रारंभिक चर्चाओं और राजस्थान की प्राथमिकताओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। नई एवं उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने के साथ वर्तमान उपलब्धियों को बनाए रखने तथा जिन क्षेत्रों में अभी गैप हैं, उन्हें भरने के लिए यूनिसेफ़ के निरंतर सहयोग के महत्व पर जोर दिया गया।

बैठक के अंत में राजस्थान सरकार एवं यूनिसेफ़ ने नवजात एवं बाल स्वास्थ्य प्रणालियों को और सुदृढ़ करने तथा प्रदेश के प्रत्येक बच्चे के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित करने की दिशा में सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार का निरंतर प्रयास है कि स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक समान रूप से पहुंचे और विशेष रूप से माताओं, नवजातों, बच्चों एवं किशोरों जैसे संवेदनशील वर्गों को समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों।

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