दिल्ली वोटर लिस्ट पर बड़ा सवाल, हजारों नाम ड्राफ्ट रोल से गायब; ASDD सूची में भी गड़बड़ी

नई दिल्ली
राजधानी दिल्ली में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में कई गड़बड़ियां सामने आ रही है। कुछ निजी समूह की ओर से किए गए री-वेरिफिकेशन में चौकाने वाले मामले सामने आए है। मंगोलपुरी में रहने वाले कामता प्रसाद ने वोटर लिस्ट में नाम कांता प्रसाद होने के चलते उसे बदलने के लिए आवेदन किया था। लेकिन, उसका निपटारा नहीं हो सका। जब ड्राफ्ट रोल जारी हुआ तो उन्हें मृतक की सूची में डाल दिया गया। अब वह समझ नहीं पा रहे हैं कि आगे क्या करें।

'जन सरोकार', 'एमकेएसएस' और 'वोटर अधिकार मंच' के बैनर तले वॉलंटियर्स ने वाई-ब्लॉक के 8 पोलिंग बूथों पर करीब 10 हजार वोटरों का घर-घर जाकर सर्वे किया। हाल में

दिल्ली में चल रहे SIR में मिल रहीं गड़बड़ियां
कुछ निजी समूह की ओर से किए गए री-वेरिफिकेशन में चौकाने वाले मामले सामने आए मंगोलपुरी में रहने वाले कामता प्रसाद के आवेदन को मृतक की सूची में डाल दिया गया।
घर पर रह रहे लोगों को सरकारी कागज में शिफ्टेड दिखा दिया गया
आयोजित एक सार्वजनिक सुनवाई के दौरान इस पीपुल्स ऑडिट की रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें खुलासा हुआ कि सैकड़ों ऐसे लोग जो अपने घरों पर रह रहे हैं, उन्हें सरकारी कागजों में शिफ्टेड दिखा दिया गया। कुछ को डेथ की सूची में भी डाला गया है। ऑडिट आंकड़ों के मुताबिक वाई ब्लॉक के लगभग 9,600 रजिस्टर्ड वोटरों में से सिर्फ 5,800 लोगों के नाम ही ड्राफ्ट SIR रोल में मिल सका।

वहीं करीब 2,800 लोगों को एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड या डुप्लीकेट (ASDD) की लिस्ट में डाल दिया गया, जबकि 1,800 से ज्यादा वोटर ऐसे निकले जिनका नाम न तो ड्राफ्ट रोल में था और न ही ASDD लिस्ट में, हालांकि उन्होंने 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोट डाला था।

सुप्रीम कोर्ट में पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाई
जन सुनवाई के दौरान पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस मदन लोकुर, बेजवाड़ा विल्सन, एनी राजा और जनरल अनिल वर्मा समेत कई जानी-मानी हस्तियों की जूरी के सामने पीड़ितों ने अपनी आपबीती सुनाई। हाउस नंबर 2267 के निवासी कांता प्रसाद ने बताया कि वह पूरी तरह स्वस्थ है और पिछली बार वोट भी दिया था, लेकिन नाम सुधरवाने की अर्जी देने के बावजूद उन्हें वोटर लिस्ट में डेथ में दर्ज कर दिया गया।

आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2025 में दिल्ली में 1.56 करोड़ वोटर थे, जो SIR शुरू होने तक घटकर 1.45 करोड़ रह गए, यानी सीधे 11 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम कट गए। बीएलओ ने दूसरे फॉर्म तक नहीं दिए वोटर अधिकार मंच की एक अधिकारी ने बताया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान बीएलओ पर सबकुछ निर्भर था। बीएलओ ने जिनके फॉर्म गुम हो गए, उन्हें दूसरे फॉर्म तक मुहैया नहीं कराए। अगर ड्राफ्ट रोल से पहले वॉर्ड कमेटियों या ग्राम सभाओं की मदद ली जाती, तो कई लोगों के बारे में सटीक जानकारी मिलती।

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