
लखनऊ
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में महिलाओं पर सभी दलों का फोकस है. सभी राजनीतिक दल भली भांति समझते हैं कि अगर महिलाएं उनके साथ आ गईं तो चुनाव में जीत दर्ज करना बिलकुल आसान हो जाएगा. क्योंकि महिलाएं जाति और धर्म से ऊपर उठकर वोट करती हैं. खास बात यह है कि वह जिस पार्टी का समर्थन करती हैं तो दिल खोलकर. इसी वजह से बीजेपी, सपा, कांग्रेस, आरएलडी समेत तमाम राजनीतिक दल महिलाओं पर डोरे डालने में जुटी हैं।
समाजवादी पार्टी पर हमेशा से गुंडागर्दी फैलाने के आरोप लगते रहे हैं. इस कहा जाता है कि महिलाएं सपा से दूरी बनाती हैं. इस नैरेटिव को बदलने के लिए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव इस बार पत्नी डिंपल यादव को प्रमुखता से आगे करते दिख रहे हैं. डिंपल की सक्रियता को लेकर सोशल मीडिया पर काफी बातें हो रही है, लेकिन इसी बीच जयंत चौधरी ने अपनी पत्नी चारू चौधरी को चुनावी मंच पर लेकर आ गए हैं. अब चारू सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. लोग डिंपल और चारू की तुलना भी करने लगे हैं।
मंच पर पहुंचते ही चारू ने अखिलेश यादव को निशाने पर लिया
गुरुवार को सहारनपुर में राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) की रैली में जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी भी भाषण देने पहुंचीं. चारू ने लिखा हुआ भाषण पढ़ने के बजाय खुद से पूरे कॉन्फिडेंस के साथ भाषण दीं. उनका भाषण भले ही दो मिनट का रहा, लेकिन उसमें ही उन्होंने ऐसी बातें कहीं जो चर्चा का विषय बन गया है. चारू चौधरी ने बिना नाम लिए अखिलेश यादव को निशाने पर लिया और कहा- ‘किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वो आपका अपमान करें या आपको सिखाएं और समझाएं. इस तरीके की बयानबाजी सिर्फ उनकी मानसिकता दर्शाता है. उनका अहंकार दर्शाता है. सच तो यह है कि यह लोकतंत्र है. सरकार किसकी बन रही है, कौन आ रहा है, जा रहा है, यह फैसला सिर्फ आप करते हैं।
चारू चौधरी का यह बयान अखिलेश यादव के उस तंज का जवाब था जिसमें, उन्होंने जयंत चौधरी का नाम लिए बगैर कहा था कि जिसको ‘चवन्नी से रुपया बनाया’ वो भी उधर भाग गए. जयंत चौधरी की पत्नी पूरे आत्मविश्वास के साथ मंच संभालती दिखीं. उन्होंने अपने छोटे भाषण में ही एनडीए के ज्यादा से ज्यादा प्रत्याशियों को जीत दिलाकर लखनऊ भेजने की अपील की. चारू चौधरी भले ही 2009 से पति जयंत के लिए चुनावी रैलियां और रोडशो करती रही हैं, लेकिन वह एंटरप्रेन्योर भी हैं. वह साउथ दिल्ली में ज्वेलरी और कपड़ों का फैशन ब्रांड शोरूम चलाती हैं. उन्होंने अभी तक कोई चुनाव नहीं लड़ा है और ना ही विधानमंडल या संसद की सदस्य बनी हैं।
डिंपल यादव को आगे कर रहे हैं अखिलेश यादव
वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव 2012 उपचुनाव में पहली बार निर्विरोध कन्नौज से सांसद चुनी गई थीं. 2014 के लोकसभा चुनाव में वह दोबारा कन्नौज से चुनाव जीतीं. 2022 में तीसरी बार मुलायम सिंह यादव के निधन से खाली हुई मैनपुरी सीट पर हुए उपचुनाव में डिंपल यादव सांसद चुनी गईं. 2024 के लोकसभा चुनाव में मैनपुरी से जीत दर्ज कर वह अभी सांसद हैं।
पिछले दिनों जंतर मंतर पर GEN-Z के आंदोलन में अखिलेश यादव की गैरमौजूदरगी में डिंपल यादव छात्रों की अगुवाई करती दिखीं. इसके बाद छात्रों पर हुए लाठीचार्च के बाद डिंपल जिस तरह से घायल छात्रों के साथ खड़ी दिखीं उसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी इस छवि की काफी तारीफ हुई।
पिछले दिनों सपा प्रमुख आगामी यूपी चुनाव को लेकर महिलाओं के लिए बड़ी घोषणाएं करने के लिए मीडिया के सामने आए थे. इस दौरान महिलाओं के लिए घोषणाएं करने की जिम्मेदारी डिंपल यादव को ही दी गई. पत्रकारों के सामने डिंपल यादव ने घोषणा की कि अगर समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो राज्य की महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये दिए जाएंगे. इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने डिंपल को पत्रकारों के सवालों का भी जवाब देने के लिए भी प्रोत्साहित करते दिखे. डिंपल ने भी बेहद मजबूती के साथ पत्रकारों के सवालों का मंजे हुए राजनेता की तरह जवाब दिया।
जहां तक डिंपल की एजुकेशन का सवाल है तो वह लखनऊ यूनिर्सिटी से बी कॉम हैं. वहीं चारू दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट हैं. इसके अलावा चारू लंदन से ज्वेलरी डिजाइनिंग का कोर्स भी कर चुकी हैं. जहां चारू भी पंजाबी फैमिली से होने के बावजूद जाट परिवार की बहू बनी हैं, वहीं डिंपल यादव राजपूत परिवार से होते हुए भी यादव परिवार की दुल्हन हैं. दोनों ने ही नारी सशक्तिकरण का परिचय देते हुए अपनी मर्जी से शादियां की हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव में देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देवियां किस रूप में अपने-अपने दल और गठबंधन के लिए वोट जुटा पाती हैं।



