पंजाब में पैरासिटामोल इंफ्यूजन समेत मैट्रोनिडाजोल इंजेक्शन के इस्तेमाल पर रोक, स्वास्थ्य विभाग का आदेश

अमृतसर.

कपूरथला के सरकारी अस्पताल में महिला मरीजों की अचानक हालत बिगड़ने की घटना के बाद पंजाब का स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड में आ गया है। विभाग द्वारा तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरे राज्य में पैरासिटामोल इंफ्यूजन और मैट्रोनिडाजोल इंजैक्शन आई.वी. 5 एम.जी./एम.एल. के कुछ बैचों के इस्तेमाल पर अगले आदेशों तक रोक लगा दी गई है।

इस संबंध में राज्य के सभी सिविल सर्जनों को व्हाट्सएप मैसेज के माध्यम से तुरंत आदेश जारी किए गए हैं कि उक्त दवाओं के संदिग्ध बैचों का किसी भी स्थिति में उपयोग न किया जाए। सूत्रों के अनुसार कपूरथला के सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद इलाज के अधीन कुछ महिला मरीजों की हालत अचानक बिगड़ गई जिससे अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया। मरीजों की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत अमृतसर के गुरु नानक देव अस्पताल में रेफर कर दिया गया। यहां पहुंचने पर डॉक्टरों की टीम ने मरीजों का तुरंत इलाज शुरू किया लेकिन इलाज के दौरान एक महिला मरीज की आई.सी.यू. में मौत हो गई।

मैडीकल कॉलेज के सीनियर अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कपूरथला से कुल 7 महिला मरीज गुरु नानक देव अस्पताल लाई गई थीं। इनमें से चार महिलाओं की हालत में सुधार आने पर उन्हें छुट्टी दे दी गई है जबकि 2 मरीज अभी भी अस्पताल में इलाज के अधीन हैं। एक मरीज की मौत से परिवारों में गम का माहौल है। इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत राज्य स्तर पर कार्रवाई की है। विभाग द्वारा स्पष्ट आदेश जारी किए गए हैं कि जिन बैचों पर संदेह है, उन्हें अस्पतालों से अलग करके सुरक्षित तरीके से रखा जाए और अगले आदेशों तक उनका उपयोग न किया जाए।

अमृतसर की सिविल सर्जन डा. रश्मि ने बताया कि जैसे ही विभाग से आदेश प्राप्त हुए तुरंत जिले के सभी सरकारी अस्पतालों के साथ तालमेल बनाकर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि संबंधित दवाओं के स्टॉक को तुरंत एकत्रित कर अलग बक्सों में रखा गया है और उन्हें लाल टेप से सील कर दिया गया है ताकि कोई भी अनजाने में भी इसका उपयोग न कर सके। सूत्रों के अनुसार यह संभावना भी जताई जा रही है कि मरीजों की हालत बिगड़ने का कारण उक्त दवाओं के कुछ खास बैच हो सकते हैं, जिसे लेकर विभाग द्वारा जांच शुरू कर दी गई है। लैब टैस्ट और तकनीकी जांच के बाद ही पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी। इस घटना ने स्वास्थ्य प्रणाली में दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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