3 अगस्त को शिव पूजा का विशेष योग, ऐसे करें रुद्राभिषेक

नई दिल्ली
इस साल सावन का पहला सोमवार शुभ योग में पड़ रहा है। सावन के पहले सोमवार पर व्रत, पूजा, जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है। सावन के पहले सोमवार पर विधि- विधान के साथ शिव पूजन करने से मन मांगी मनोकामना पूर्ति का वरदान प्राप्त होता है। 3 अगस्त 2026 के दिन सावन का पहला सोमवार व्रत रखा जाएगा। रुद्राभिषेक खासतौर पर विद्वान् पंडित से करवाना अत्यंत सिद्ध माना जाता है। आप स्वयं भी रुद्राष्टाध्यायी का पाठ कर इस विधि को संपूर्ण कर सकते हैं। सही मुहूर्त में सही विधि से ही रुद्राभिषेक करना चाहिए। ऐसे में आइए जानते हैं घर पर रुद्राभिषेक करने का
आसान तरीका और मुहूर्त-
‘घर पर रुद्राभिषेक कैसे करें’, जानें सावन के पहले सोमवार पर रुद्राभिषेक का उत्तम मुहूर्त

सावन के पहले सोमवार पर रुद्राभिषेक कैसे करें?

  •     स्नान आदि से निवृत होकर सबसे पहले गणेश जी का ध्यान करें।
  •     इसके बाद भगवान शिव, पार्वती सहित सभी देवता और नौ ग्रहों का ध्यान कर रुद्राभिषेक करने का संकल्प लें।
  •     मिट्टी से शिवलिंग बनाएं और उत्तर दिशा में स्थापित करें।
  •     रुद्राभिषेक करने वाले व्यक्ति का मुख पूर्व दिशा की तरफ होना चाहिए।
  •     गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करते हुए इस विधि की शुरुआत करें।
  •     सबसे पहले शिवलिंग को गंगाजल से स्नान करवाएं।
  •     इसके बाद गन्ने के रस, गाय के कच्चे दूध, शहद, घी और मिश्री से शिवलिंग का अभिषेक करें।
  •     हर सामग्री से अभिषेक करने से पहले और बाद में पवित्र जल या गंगाजल चढ़ाएं।
  •     प्रभु पर बिल्व पत्र, सफेद चंदन, अक्षत, काला तिल, भांग, धतूरा, आंक, शमी पुष्प व पत्र, कनेर, कलावा, फल, मिष्ठान और सफेद फूल अर्पित करें।
  •     इसके बाद शिव परिवार सहित समस्त देवी-देवताओं की पूजा करें।
  •     प्रभु को भोग लगाएं।
  •     अंत में पूरी श्रद्धा के साथ शिव जी की आरती करें।
  •     अंत में क्षमा प्रार्थना करें।
  •     इस क्रिया के दौरान अर्पित किया जाने वाला जल या अन्य द्रव्यों को इकट्ठा कर घर के सभी कोनों और सभी लोगों पर छिड़के और इसे प्रसाद स्वरूप में भी ग्रहण कर सकते हैं।

रुद्राभिषेक के समय जरूर ध्यान रखें ये बात
शिव जी का रुद्राभिषेक करते समय शिव मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें।

सावन के पहले सोमवार पर शिव जी का रुद्राभिषेक और जलाभिषेक कब करें?
    ॐ नमः शिवाय
    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् |
    उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ||

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