फॉरेक्स निवेश बना धोखे का सौदा! डोंगरगढ़ में अरबों की ठगी के बाद भड़के निवेशक

डोंगरगढ़.

धर्मनगरी डोंगरगढ़ में उस समय हड़कंप मच गया, जब देश के अलग-अलग राज्यों से आए 100 से अधिक निवेशक रेलवे चौक स्थित वैसलियन चर्च के पास एक मकान के बाहर एकत्र हो गए। निवेशकों का आरोप था कि फॉरेक्स ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ‘लॉन्ग एशिया’ के जरिए उनसे करोड़ों नहीं, बल्कि अरबों रुपये की कथित ठगी की गई है, और इस पूरे नेटवर्क के तार डोंगरगढ़ से जुड़े हैं।

देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और कुछ देर के लिए सड़क पर जाम जैसी स्थिति बन गई। हालात बिगड़ते देख पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाइश देकर स्थिति को नियंत्रित किया। मौके पर पहुंचे निवेशकों ने बताया कि वे पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा, हिमाचल प्रदेश, मध्यप्रदेश समेत देश के करीब 10 राज्यों से डोंगरगढ़ पहुंचे हैं। उनका आरोप है कि इस ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को संचालित करने वाले लोगों ने ऑनलाइन जूम मीटिंग, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों से लोगों को फॉरेक्स ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का सपना दिखाया। शुरुआत में निवेशकों को समय पर अच्छा रिटर्न दिया गया, जिससे लोगों का भरोसा बढ़ता चला गया।

कई लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी निवेश कर दी, तो कई लोगों ने बैंक खातों से रकम निकालकर, तो कुछ ने कर्ज लेकर भी इस प्लेटफॉर्म में पैसा लगाया। निवेशकों का दावा है कि फरवरी 2026 से प्लेटफॉर्म पर अचानक टेक्निकल इश्यू बताकर निकासी बंद कर दी गई। इसके बाद निवेशकों का पैसा फंस गया और प्लेटफॉर्म से भुगतान मिलना बंद हो गया। पीड़ितों का आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में पांच लोग शामिल हैं और देशभर के एक लाख से अधिक निवेशक इसकी चपेट में आए हैं। उनका दावा है कि फंसी हुई राशि अरबों रुपये तक पहुंच चुकी है। हालांकि, इस दावे की अभी किसी सरकारी एजेंसी या पुलिस ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

आरोपियों की तलाश में डोंगरगढ़ पहुंचे निवेशकों ने मामले से जुड़े बताए जा रहे एक व्यक्ति के घर का घेराव भी किया। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। उन्होंने बाहर से आए लोगों को समझाया कि कानून हाथ में लेने के बजाय पुलिस के माध्यम से कार्रवाई कराना ही उचित होगा। इसके बाद पुलिस ने सभी को वहां से हटाया और थाने पहुंचकर कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी। घटना के बाद सभी निवेशक डोंगरगढ़ थाने पहुंचे और थाना प्रभारी भूषण चंद्राकर से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक किसी भी निवेशक ने डोंगरगढ़ थाने में लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई थी।

संबंधित थानों में शिकायत दर्ज करने की सलाह
थाना प्रभारी भूषण चंद्राकर ने बताया कि विभिन्न राज्यों से आए लोगों ने अपने साथ ऑनलाइन ठगी होने की जानकारी दी है, लेकिन अभी तक कोई लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने सभी को सलाह दी है कि जिस स्थान से उनके साथ ऑनलाइन ठगी हुई है, पहले वहां के संबंधित थाने में शिकायत दर्ज कराएं। यदि जांच के दौरान डोंगरगढ़ पुलिस के सहयोग की आवश्यकता होगी तो नियमानुसार हर संभव सहयोग किया जाएगा।

कुलजीत, जोगेंद्र और अभय ने कराया निवेश
नागपुर से आए निवेशक रविशंकर बाघ ने मीडिया से चर्चा में आरोप लगाया कि कुलजीत सिंह भाटिया, जोगेंद्र वर्मा और अभय कुनले सहित कुछ लोगों ने फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर निवेश करवाया और अब बड़ी संख्या में लोगों की रकम फंस गई है। उन्होंने दावा किया कि प्रभावित निवेशक राजनांदगांव पुलिस अधीक्षक और रेंज आईजी से मुलाकात कर निष्पक्ष जांच तथा आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे।

अधिक मुनाफे के लालच में फंसी बड़ी रकम
बहरहाल, मामले में आरोपित पक्ष का बयान सामने नहीं आया है, और पुलिस ने भी अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। लेकिन थोड़े समय में अधिक मुनाफा लेने के चक्कर में फिलहाल ये विभिन्न राज्यों के निवेशक अपने ही पैसों के लिए दर-दर भटकते दिखाई दे रहे हैं।

क्या है ‘लॉन्ग एशिया’?
लॉन्ग एशिया (Long Asia) खुद को एक ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म बताता है, जहां विदेशी मुद्रा और अन्य वित्तीय उत्पादों में निवेश कराने का दावा किया जाता है। हालांकि, सार्वजनिक रिकॉर्ड में इसे भारत में RBI या SEBI से अधिकृत फॉरेक्स ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है। इससे जुड़े कुछ डोमेन पर न्यूज़ीलैंड की वित्तीय नियामक संस्था FMA पहले ही चेतावनी जारी कर चुकी है और निवेशकों को सावधान रहने की सलाह दी है। भारत में फॉरेक्स ट्रेडिंग केवल अधिकृत संस्थाओं और FEMA के नियमों के तहत ही की जा सकती है। ऐसे में यदि कोई प्लेटफ़ॉर्म अधिक मुनाफे का लालच देकर निवेश कराता है और बाद में पैसे निकालने पर रोक लगा देता है, तो उसकी वैधता और काम करने के तरीके की जांच जरूरी हो जाती है। फिलहाल, डोंगरगढ़ से जुड़े मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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