
चंडीगढ़.
हरियाणा में बीपीएल परिवारों को गेहूं के साथ मिलने गले एक लीटर सरसों का तेल अगले माह से नहीं मिलेगा। उसकी जगह उन्हें तेल की राशि देने पर प्रदेश सरकार विचार कर रही है। हालांकि अभी तय नहीं हुआ है कि राशि दी जाए के उसकी जगह कुछ अन्य खाद्य पदार्थ दिया जाए।
एक सप्ताह के अंदर यह तय कर लिया जाएगा। अगर तेल दिया गया तो उसकी राशि सीधे लाभार्थी के खाते में डाली जाएगी। बता दें कि पश्चिम एशिया में युद्ध संकट के चलते पाम तथा सोयाबीन तेल का आयात प्रभावित होने से सरसों में उछाल आया था। इसके चलते मंडियों में सरसों की सरकारी खरीद कम हुई थी। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक अधिक रेट मिलने से किसानों ने बाजार में सरसों बेच दी थी। सरकारी एजेंसियों को तय लक्ष्य से कम सरसों मिला था। हालांकि सरकार ने इस वर्ष 6200 रुपये प्रति क्विंटल सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया था, जो पिछले साल के मुकाबले 250 रुपये प्रति क्विंटल अधिक था। लेकिन बाजार में सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य से डेढ़ से दो हजार रुपये प्रति क्विंटल अधिक में बिक रही थी।
पश्चिम एशिया में युद्ध संकट के चलते पाम तथा सोयाबीन तेल का दूसरे देशों से होने वाला आयात बुरी तरह से प्रभावित होने के चलते सरसों की मांग बढ़ गई थी। किसानों ने फायदा होते देख सरकारी एजेंसियों के पास जाने के बजाय प्राइवेट खरीदारों को फसल बेच दी थी। अंत्योदय अन्न योजना में होगा बदलाव हरियाणा सरकार अंत्योदय अन्न योजना (एएवाई) यानी गुलाबी राशन कार्ड धारकों के लिए गेहूं वितरण का नियम बदलने जा रही है। अभी तक एक राशन कार्ड पर हर महीने 35 किलो गेहूं मिलता है। अब नई व्यवस्था में हर पात्र सदस्य को 7 किलो गेहूं दिया जाएगा। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है। संभव है कि अगले महीने से नया नियम लागू कर दिया जाएगा। इस बदलाव से बड़े परिवारों को फायदा होगा जबकि पांच से कम सदस्यों वाले परिवारों को पहले की तुलना में कम गेहूं मिलेगा।



