‘चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकते’ : सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका ठुकराई

भोपाल 

सुप्रीम कोर्ट से कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को बड़ा झटका लगा है. शीर्ष अदालत ने मीनाक्षी की राज्यसभा उम्मीदवारी खारिज होने पर दखल देने से कर दिया इनकार. सर्वोच्च अदालत ने कांग्रेस नेता की याचिका खरिज करते हुए कहा कि हम इसमें दखल नहीं दे सकते हैं. जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस चंदूकर की पीठ ने ये फैसला सुनाया। 

सिंघवी ने दी थी दलीलें 
इससे पहले मीनाक्षी की तरफ से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलीलें दीं. उन्होंने कहा कि कुछ ऐसा हुआ है जो शॉकिंग है. उन्होंने कहा कि एक निजी शिकायत पर नोटिस हुआ है. सिंघवी ने कहा कि ये एक निजी शिकायत है, जिसमें संज्ञान नहीं लिया गया है. उन्होंने कहा कि आरपी एक्ट कहता  है कि कम से कम आरोप तय होने चाहिए। 

मीनाक्षी को हाईकोर्ट जाने का दिया सुझाव 
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चुनाव याचिका के जरिए मीनाक्षी नटराजन हाईकोर्ट जा सकती हैं. सिंघवी ने दावा किया कि ये केस 2022 का है जब मीनाक्षी तेलंगाना की इंचार्ज नहीं थी. मामले का संज्ञान भी नहीं लिया गया था. यह मामला तेलंगाना की एक अदालत में 2022 के पार्टी के अंदरूनी मसले से जुड़ी एक निजी शिकायत से संबंधित है. अदालत ने किसी अपराध का वास्तविक संज्ञान लेने से पहले नटराजन को केवल एक प्रारंभिक सिविल 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया था. सिंघवी ने कहा कि अगर रिटर्निंग ऑफीसर मनमाने ढंग से काम करता किसी एक पार्टी को जिससे फायदा होता है तो उसमें कोर्ट दखल दे सकता है. सिंघवी ने सवाल उठाए कि नामांकन वापस लेने के आखिरी दिन नतीजे क्यों घोषित किए गए? हालांकि, शीर्ष अदालत उनकी दलीलों से सहमत नहीं हुआ और उनके मुवक्किल मीनाक्षी की याचिका खारिज कर दी। 

बता दें कि मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को ये बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन जांच (स्क्रूटनी) के दौरान खारिज कर दिया गया था. इसके साथ ही राज्य की तीसरी राज्यसभा सीट पर मुकाबला समाप्त हो गया और भाजपा उम्मीदवार महेश केवट का निर्विरोध निर्वाचित होना तय हो गया. बीजेपी ने कांग्रेस उम्मीदवार पर नामांकन एफिडेविट में आपराधिक मामला छिपाने का आरोप लगाया था। 

जांच में सामने आया कि उन्होंने अपने हलफनामे में एक अदालती शिकायत का जिक्र नहीं किया था. इस वजह से उनका नामांकन पत्र अधूरा माना गया और उसे रद्द कर दिया गया. विधानसभा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बीजेपी के उम्मीदवार महेश केवट ने इस बारे में चुनाव अधिकारी के सामने एक शिकायत दर्ज कराई थी. इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि नटराजन ने तेलंगाना में अपने खिलाफ दर्ज एक अदालती मामले की जानकारी जानबूझकर छिपाई है। 

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी 
राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र खारिज किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि किसी उम्मीदवार का नामांकन निर्वाचन अधिकारी द्वारा निरस्त किए जाने के बाद उसके पास राहत पाने के लिए भारत के निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई अन्य उपाय नहीं होता. अदालत ने नटराजन से यह भी पूछा कि क्या वह ऐसा कोई फैसला दिखा सकती हैं, जिसमें अदालत ने इस प्रकार के मामलों में हस्तक्षेप किया हो। 

अदालत ने सिंघवी से पूछा सवाल 
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने कहा कि निर्णय कितना भी त्रुटिपूर्ण क्यों न हो, एक बार नामांकन खारिज हो जाने के बाद सामान्यतः इसका उपाय कहीं और उपलब्ध होता है. क्या इस अदालत का ऐसा कोई निर्णय है, जिसमें हमने इस चरण में हस्तक्षेप किया हो? नटराजन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि किसी उम्मीदवार को केवल वही आपराधिक मामला घोषित करना होता है, जिसमें न्यूनतम दो वर्ष की सजा का प्रावधान हो. उन्होंने कहा कि वर्तमान मामले में केवल समन जारी हुए थे। 

सिंघवी की दलील- गलत तरीके से खारिज हुई उम्मीदवारी 
सिंघवी ने कहा कि मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए नटराजन का नामांकन पत्र निर्वाचन अधिकारी ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत एक आपराधिक मामले का खुलासा न करने के आरोप में गलत तरीके से खारिज कर दिया. राज्यसभा चुनाव के रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा के आदेश में कहा गया कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने अपने नामांकन के साथ दाखिल फॉर्म-26 में एक कोर्ट में शिकायत का उल्लेख नहीं किया और इस प्रकार अधूरा शपथपत्र प्रस्तुत किया। 

क्या था मामला 
मध्य प्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी के अनुसार, सत्तारूढ़ बीजेपी के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी से शिकायत की थी कि नटराजन ने अपने शपथपत्र में तेलंगाना में उनके खिलाफ दर्ज एक मामले का उल्लेख नहीं किया है. इसी के आधार पर चुनाव अधिकारी ने मीनाक्षी नटराजन की उम्मीदवारी रद्द कर दी थी। 

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